सन्दर्भ:
: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग ज़िले में श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 के लिए ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ नाम से एक टेक्नोलॉजी-आधारित सुरक्षा पहल शुरू की है।
प्रोजेक्ट हॉक आई के बारे में:
- प्रोजेक्ट हॉक आई एक एडवांस्ड, टेक्नोलॉजी से जुड़ा सुरक्षा और निगरानी सिस्टम है जिसे धार्मिक यात्रा के रास्तों की सुरक्षा के लिए लागू किया गया है।
- यह ऊंचाई से हवाई ट्रैकिंग को ज़मीनी स्तर के बायोमेट्रिक सिस्टम, खास टैक्टिकल यूनिट और मज़बूत निगरानी चौकियों के साथ जोड़कर एक लगातार निगरानी का घेरा बनाता है।
- आयोजक एजेंसी: इस पहल की योजना, इसे लागू करने और इसके प्रबंधन का काम जम्मू-कश्मीर पुलिस बल की अनंतनाग ज़िला पुलिस ने किया है।
- लक्ष्य और उद्देश्य:
- लगातार निगरानी: यात्रा मार्ग के संवेदनशील हिस्सों पर 24×7 निगरानी रखना।
- एहतियाती सुरक्षा: संदिग्ध गतिविधियों का जल्द पता लगाना ताकि सुरक्षा बल तेज़ी से कार्रवाई कर सकें।
- सुरक्षित तीर्थयात्रा: तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, भीड़ का सही प्रबंधन और यात्रा का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना।
- मुख्य विशेषताएं:
- एरियल ड्रोन ग्रिड: रास्ते की अहम जगहों पर पांच एडवांस्ड ड्रोन तैनात किए गए हैं जो कमांड सेंटर को लाइव हवाई निगरानी फुटेज भेजते हैं, जिससे हालात की बेहतर जानकारी मिलती है।
- फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS): अहम जगहों पर अत्याधुनिक FRS सॉफ्टवेयर लगाया गया है जो यात्रियों की प्रोफाइल का मिलान करता है और ब्लैकलिस्टेड या संदिग्ध लोगों की पहचान तुरंत कर लेता है।
- हाई-डेंसिटी CCTV कवरेज: संवेदनशील हिस्सों पर 416 हाई-रिज़ॉल्यूशन CCTV कैमरों का नेटवर्क लगाया गया है ताकि ज़मीनी स्तर पर लगातार निगरानी की जा सके।
- मचान मोर्चे (निगरानी चौकियां): बहुत संवेदनशील या ऊंचे स्थानों पर 28 रणनीतिक निगरानी चौकियां बनाई गई हैं जो ज़मीनी बलों के लिए स्थिर वॉचटावर का काम करती हैं।
- शार्पशूटर की तैनाती: ऊंचाई वाली खास जगहों पर 22 खास तौर पर प्रशिक्षित स्नाइपर टीमें तैनात की गई हैं ताकि आतंकवाद-रोधी सहायता और तुरंत टैक्टिकल कार्रवाई की जा सके।
- इसका महत्व:
- खतरों का जल्द पता लगाने के लिए ड्रोन, FRS और AI-सक्षम कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था ‘प्रतिक्रियाशील’ (घटना के बाद कार्रवाई) से बदलकर ‘एहतियाती’ (घटना से पहले रोकथाम) हो जाती है।
- हवाई और ज़मीनी निगरानी को मिलाकर ‘ब्लाइंड स्पॉट‘ (जहां नज़र न पहुंचे) को खत्म किया जाता है और हिमालय के मुश्किल इलाकों में भी लगातार निगरानी सुनिश्चित की जाती है।
