प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर भारत की प्रतिबद्धता

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PLASTIC PRADUSHAN UNEA
प्लास्टिक प्रदूषण

सन्दर्भ-भारत स्थलीय और जलीय पारिस्थितिक तंत्र के साथ-साथ मानव कल्याण पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए प्लास्टिक प्रदूषण को पहचान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रमुख तथ्य-नैरोबी,भारत ने 2019 में पिछले UNEA में एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक (Single Use Plastic) उत्पाद प्रदूषण को पहचान करने के लिए एक प्रस्ताव का संचालन किया था।
:सरकार ने हाल ही में नए प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत प्लास्टिक पैकेजिंग पर विस्तारित उत्पादकों की जिम्मेदारी (EPR) पर दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया है, जिसमें एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया गया है,जिनमें कम उपयोगिता और उच्च कूड़े फ़ैलाने की क्षमता है।
:सरकार की नीतियों,योजनाओं और कार्यक्रमों में सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को मुख्यधारा में लाने के लिए सक्रिय कदम उठाए गए हैं।
:भारत ने कहा कि हमारी सतत विकास नीतियां अक्षय ऊर्जा, टिकाऊ गतिशीलता,स्थायी आवास और कई अन्य क्षेत्रों को कवर करती हैं।
:बहुपक्षीय पर्यावरण सम्मेलनों के तहत समझौतों के अनुसार मजबूत वैश्विक भागीदारी के माध्यम से एसडीजी की दिशा में प्रगति तेज हो सकती है।
:हमारा मंत्रालय 2022 तक सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के प्रधानमंत्री के निर्देशों और विजन का पालन करते हुए प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022 को पहले ही लाया जा चुका है।
:पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार,प्लास्टिक प्रदूषण पर सदस्य देशों –पेरू,रवांडा,जापान और भारत द्वारा तीन प्रस्ताव रखे गए थे।
:जिनमे पेरू,रवांडा और जापान के दो मसौदा प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य के सिद्धांत पर आधारित थे,जबकि भारतीय मसौदा प्रस्ताव देशों द्वारा तत्काल सामूहिक स्वैच्छिक कार्रवाई के सिद्धांत पर आधारित था।
:वैश्विक कार्रवाई की अनुमति देने के लिए,भारत एक नई अंतरराष्ट्रीय कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि के लिए एक अंतर-सरकारी वार्ता समिति की स्थापना के लिए सहमत हुआ,क्योकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल बातचीत में रचनात्मक रूप से लगा हुआ है।


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