सन्दर्भ:
: हाल ही में, झारखंड के भगैया सिल्क, कुचाई सिल्क, मुंडा ज्वेलरी और बांस की कलाकृतियों को प्रतिष्ठित नए GI टैग दिया गया है।
नए GI टैग के बारें में:
- भगैया सिल्क:
- यह हाथ से काता हुआ सिल्क का कपड़ा है जिसे ज़्यादातर संथाल आदिवासी औरतें बुनती हैं।
- ये सिल्क की किस्में, लोकल नॉलेज सिस्टम और देसी कारीगरी में गहराई से जुड़ी हुई हैं, और गांव के समुदायों में पीढ़ियों से चले आ रहे हुनर को दिखाती हैं।
- कुचाई सिल्क:
- इसे आसन और अर्जुन के पेड़ों पर पाले जाने वाले टसर रेशम के कीड़ों से बनाया जाता है।
- यह झारखंड की पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जो गांव के इलाकों में रोज़ी-रोटी देती है।
- इसकी शुरुआत सरायकेला-खरसावां के छोटे से गांव – ‘कुचाई’ में हुई थी और अब यह पूरे झारखंड में फैल गई है।
- झारखंड बांस क्राफ्ट:
- यह प्रोडक्ट लोकल बांस से बनाया जाता है जो अब बड़े मार्केट में मिलेगा।
- इसमें ग्रामीण कारीगरों की रचनात्मकता और हुनर शामिल है, जो स्थानीय बांस का इस्तेमाल करके कई तरह के उपयोगी और सजावटी सामान बनाते हैं।
- मुंडा ज्वेलरी:
- यह मुंडा आदिवासी समुदाय की खास कलात्मक परंपरा है।
- इसकी खासियत इसके अनोखे डिज़ाइन, कारीगरी और सांस्कृतिक महत्व हैं, यह ज्वेलरी झारखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत को दिखाती है।
