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52वां G7 शिखर सम्मेलन52वां G7 शिखर सम्मेलन
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सन्दर्भ:

: भारत के प्रधानमंत्री, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के आधिकारिक निमंत्रण पर 52वां G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस के एवियन पहुँचे।

52वां G7 शिखर सम्मेलन के बारें में:

  • ज्ञात हो कि यह आमंत्रित अतिथि के रूप में भारत की कुल मिलाकर 13वीं और लगातार सातवीं उपस्थिति है।
  • G7 (ग्रुप ऑफ़ सेवन) समिट एक सालाना अंतरराष्ट्रीय मंच है, जो दुनिया की सबसे विकसित औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं को एक साथ लाता है। यह अहम अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक प्रतिक्रिया तय करने के मकसद से, उच्च-स्तरीय राजनीतिक और आर्थिक तालमेल का एक अहम मंच है।
  • मेज़बान की जानकारी:
    • मौजूदा मेज़बान (2026): फ्रांस का एवियन शहर, इमैनुएल मैक्रॉन की अध्यक्षता में 15-17 जून, 2026 को 52वें आयोजन की मेज़बानी कर रहा है।
    • अगले साल का मेज़बान (2027): रोटेटिंग प्रेसिडेंसी (बारी-बारी से मिलने वाली अध्यक्षता) आधिकारिक तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका को सौंप दी जाएगी।
  • G7 समिट का इतिहास:
    • शुरुआती दौर: यह ग्रुप 1970 के दशक के बीच में वित्त मंत्रियों और नेताओं की एक अनौपचारिक बैठक के तौर पर शुरू हुआ था। इसका मकसद उस समय के ग्लोबल ऑयल शॉक (तेल की कीमतों में अचानक भारी उछाल) और मैक्रो-इकोनॉमिक संकटों के समाधान के लिए तालमेल बिठाना था।
    • G8 में बदलाव और वापसी: लंदन (1977) और ओटावा (1981) समिट से ही यूरोपीय संघ (तब यूरोपीय समुदाय) को धीरे-धीरे सभी राजनीतिक सत्रों में शामिल किया जाने लगा। 1998 में रूसी संघ को औपचारिक रूप से शामिल करने के साथ यह ग्रुप G8 बन गया।
    • 2014 में पुनर्गठन: यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने के कारण रूस की भागीदारी को सस्पेंड करने के बाद, 2014 में नेताओं ने फिर से पूरी तरह G7 फॉर्मेट अपना लिया।
  • G7 के सदस्य:
    • G7 में सात प्रमुख विकसित औद्योगिक अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं, साथ ही यूरोपीय संघ भी एक सहभागी सदस्य के तौर पर इसमें शामिल है: कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका।
      • यूरोपीय संघ एक पूरी तरह से जुड़े हुए, लेकिन सूची में अलग से न गिने जाने वाले सदस्य के तौर पर इसमें भाग लेता है।
    • 2026 के शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित अतिथि देश: भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, केन्या और ब्राज़ील।
  • फ़ोरम के मुख्य काम:
    • पूरक आर्थिक दिशा-निर्देश: अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक कार्यों में तालमेल बिठाने, व्यापक आर्थिक अस्थिरताओं को संतुलित करने और वैश्विक वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए G20 जैसे बड़े ढांचों के साथ मिलकर काम करता है।
    • भू-राजनीतिक संकट का समाधान: अहम अंतरराष्ट्रीय विवादों, समुद्री सुरक्षा और शांति व्यवस्था से जुड़ी साझा रणनीतिक नीतियां बनाता है।
    • वैश्विक तकनीकी मानक तय करना: उभरती हुई तकनीकों के लिए अंतरराष्ट्रीय गवर्नेंस के ढांचे बनाता है; 2026 के एजेंडे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित इस्तेमाल और नैतिक भविष्य पर खास ज़ोर दिया गया है।
    • बाध्यकारी नीतियां लागू करना: संयुक्त मंत्री-स्तरीय घोषणाएं और बयान जारी करता है जो सभी शामिल सदस्य देशों के लिए राजनीतिक रूप से बाध्यकारी होते हैं।

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By gkvidya

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