सन्दर्भ:
: केंद्रीय गृह मंत्री ने नई दिल्ली में जनगणना 2027 हेतु मैस्कॉट जिनके नाम क्रमशः प्रगति और विकास है लॉन्च किए और डिजिटल टूल्स का भी सॉफ्ट-लॉन्च किया गया।
जनगणना 2027 हेतु मैस्कॉट के बारें में:
- भारत सरकार ने जनगणना 2027 के लिए दो ऑफिशियल मैस्कॉट लॉन्च किए हैं ताकि सेंसस के काम में लोगों की अवेयरनेस और हिस्सेदारी बढ़ाई जा सके।
- ये मैस्कॉट कम्युनिकेशन एंबेसडर के तौर पर काम करेंगे, और अलग-अलग कम्युनिटी में जनगणना प्रोसेस के बारे में जानकारी फैलाने में मदद करेंगे।
- मैस्कॉट के नाम:
- प्रगति- महिला एन्यूमेरेटर मैस्कॉट
- विकास- पुरुष एन्यूमेरेटर मैस्कॉट
- मैस्कॉट की थीम/विषय:
- मैस्कॉट देश बनाने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर हिस्सेदारी को दिखाते हैं।
- ये 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए सबको साथ लेकर चलने वाले विकास और मिलकर हिस्सा लेने की भावना को दिखाते हैं।
- जनगणना 2027 की खास बातें:
- दुनिया की सबसे बड़ी सेंसस एक्सरसाइज: सेंसस 2027 दुनिया भर में सबसे बड़ी आबादी की गिनती की एक्सरसाइज होगी, जिसमें 30 लाख से ज़्यादा एन्यूमेरेटर, सुपरवाइज़र और अधिकारी शामिल होंगे।
- भारत में पहली पूरी तरह से डिजिटल सेंसस: डेटा इकट्ठा करने के लिए पारंपरिक कागज़ पर आधारित गिनती की जगह सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।
- खुद से गिनती करने की सुविधा शुरू की गई: नागरिक घर-घर जाकर सर्वे से पहले 16 भाषाओं में एक सुरक्षित पोर्टल के ज़रिए घर की जानकारी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
- दो-फ़ेज़ की सेंसस प्रक्रिया:
- फ़ेज़ 1- हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (HLO): घरों की स्थिति और सुविधाओं पर डेटा।
- फ़ेज़ 2- आबादी की गिनती (PE): डेमोग्राफिक, सामाजिक और आर्थिक जानकारी इकट्ठा करना।
- चार डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए:
- हाउसलिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर (HLBC): सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल करके वेब-बेस्ड मैपिंग टूल।
- HLO मोबाइल एप्लीकेशन: एन्यूमरेटर के लिए फील्ड डेटा इकट्ठा करने के लिए ऑफलाइन मोबाइल ऐप।
- सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल: नागरिकों के लिए सेंसस डेटा ऑनलाइन जमा करने के लिए सुरक्षित प्लेटफॉर्म।
- सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS): एडमिनिस्ट्रेटर के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग डैशबोर्ड।
- जाति डेटा कलेक्शन: पॉपुलेशन एन्यूमरेशन फेज़ में जाति से जुड़े सवाल शामिल होंगे, जिससे यह सोशल पॉलिसी प्लानिंग के लिए एक ज़रूरी डेटा एक्सरसाइज़ बन जाएगी।
