सन्दर्भ:
: सिरसा किन्नू को हाल ही में ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ (GI) टैग मिला है, और चेन्नई में रजिस्ट्री ने इसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को मंज़ूरी दे दी है।
सिरसा किन्नू के बारे में:
- यह हरियाणा के सिरसा ज़िले में उगाया जाने वाला किन्नू का एक प्रकार है।
- यह हरियाणा का पहला ऐसा फल है जिसे ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ (GI) टैग मिला है।
- किन्नू के बारें में:
- किन्नू खट्टे फलों (सिट्रस) की एक हाइब्रिड किस्म है।
- यह दो सिट्रस किस्मों – ‘किंग’ (सिट्रस नोबिलिस) और ‘विलो लीफ’ मैंडरिन (सिट्रस डेलिसिओसा) – का हाइब्रिड है।
- इस हाइब्रिड किस्म को 1915 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया के सिट्रस एक्सपेरिमेंटेशन स्टेशन में एच.बी. फ्रॉस्ट ने विकसित किया था।
- यह गोल और बड़ा होता है, और इसका छिलका संतरे की तरह सुनहरे-नारंगी रंग का होता है।
- इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है।
- इसमें काफ़ी मात्रा में रस होता है, इसलिए यह जूस और पल्प (गूदा) निकालने के लिए बहुत अच्छा है।
- यह विटामिन C और कैल्शियम व पोटैशियम जैसे मिनरल्स का अच्छा स्रोत है, जो सेहत के लिए फ़ायदेमंद हैं।
- इसमें 0.2 से 0.3% पेक्टिन होता है, जो कैंसर-रोधी है और कोलेस्ट्रॉल कम करने में भी मदद करता है।
- किन्नू के छिलके में तेल होता है जिसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स में किया जाता है।
- यह उत्तर भारत में बड़े पैमाने पर उगाया जाने वाला फल है।
- देश में किन्नू उत्पादन वाले इलाक़ों में पंजाब की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा है; इसके अलावा राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी इसकी खेती होती है।
- पंजाब में इसे “फलों का राजा” कहा जाता है।
- इसमें गर्मियों में 40°C तक के ऊंचे तापमान और सर्दियों में 0°C तक के तापमान को सहने की क्षमता होती है।
