सन्दर्भ:
: देश का पहला मानव-हाथी संघर्ष अनुसंधान केंद्र झारखंड के पलामू टाइगर रिज़र्व में स्थापित किया जाएगा।
पलामू टाइगर रिज़र्व के बारें में:
- यह झारखंड के छोटानागपुर पठार पर स्थित है।
- यह रिज़र्व बेतला राष्ट्रीय उद्यान का एक हिस्सा है।
- यह देश में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत के समय बनाए गए पहले 9 टाइगर रिज़र्व में से एक है।
- यह दुनिया का पहला ऐसा रिज़र्व है जहाँ 1932 में ही J.W. निकोलसन की देखरेख में पगमार्क (पंजों के निशान) गिनकर बाघों की जनगणना की गई थी।
- भू-भाग: यहाँ का भू-भाग ऊबड़-खाबड़ है, जिसमें घाटियाँ, पहाड़ियाँ और मैदान शामिल हैं। इसकी भूवैज्ञानिक संरचना नाइस (gneiss) से बनी है, जिसमें ग्रेनाइट और चूना पत्थर भी शामिल हैं।
- नदियाँ: इस क्षेत्र में तीन नदियाँ बहती हैं – उत्तरी कोयल, औरंगा और बूढ़ा – जो घाटियों से होकर गुज़रती हैं।
- यह क्षेत्र सूखा-प्रवण है, और बूढ़ा यहाँ की एकमात्र बारहमासी नदी है।
- वनस्पति: यहाँ की वनस्पति में नम पर्णपाती और शुष्क पर्णपाती वन शामिल हैं।
- पेड़-पौधे: यहाँ मुख्य रूप से साल और बाँस के पेड़ पाए जाते हैं।
- जीव-जंतु: इस रिज़र्व में पाए जाने वाले कुछ प्रमुख और मुख्य जीवों में बाघ, एशियाई हाथी, तेंदुआ, भूरा भेड़िया, जंगली कुत्ता, गौर, स्लॉथ भालू और चार सींग वाला मृग शामिल हैं।
