सन्दर्भ:
: अहमदाबाद स्थित कांकरिया कोचिंग डिपो, कोचों की धुलाई और रखरखाव में इस्तेमाल होने वाले अपशिष्ट जल को रीसायकल करके भारत का पहला जल-तटस्थ रेलवे डिपो (Water-Neutral Railway Depot) बन गया है।
जल-तटस्थ रेलवे डिपो के बारे में:
- गुजरात के अहमदाबाद में स्थित कांकरिया कोचिंग डिपो, भारत का पहला ऐसा रेलवे डिपो है जिसने रेलवे कोच की नियमित सफ़ाई और रखरखाव के दौरान निकलने वाले गंदे पानी को साफ़ करके और उसका दोबारा इस्तेमाल करके ‘वॉटर न्यूट्रैलिटी’ (जल तटस्थता) हासिल की है।
- यह ताज़े पानी पर निर्भरता को कम करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि परिचालन के लिए ज़रूरी लगभग सारा पानी रीसायकल किए गए पानी से ही पूरा हो, जिससे एक टिकाऊ रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलता है।
- मुख्य विशेषताएं:
- फाइटोरिमेडिएशन-आधारित उपचार प्रणाली: यह डिपो फाइटोरिमेडिएशन का उपयोग करता है – एक पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रिया जिसमें विशेष रूप से चुने गए पौधे स्वाभाविक रूप से प्रदूषकों को सोख लेते हैं और गंदे पानी को दोबारा इस्तेमाल से पहले शुद्ध करते हैं।
- बहु-स्तरीय जल शुद्धिकरण: गंदा पानी वेटलैंड उपचार से गुज़रता है, जिसके बाद कार्बन फ़िल्ट्रेशन, रेत फ़िल्ट्रेशन और अल्ट्रावॉयलेट (UV) कीटाणुशोधन होता है, ताकि सुरक्षित और कुशल दोबारा इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके।
- व्यापक जल संरक्षण: यह प्रणाली रोज़ाना लगभग 1.60 लाख लीटर और सालाना लगभग 5.84 करोड़ लीटर पानी बचाती है, जिससे ताज़े पानी की खपत और परिचालन लागत में काफ़ी कमी आती है।
- महत्व:
- यह दर्शाता है कि भारतीय रेलवे पर्यावरण मानकों का पालन करते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में स्थिरता को कैसे शामिल कर सकता है।
- ताज़े पानी के संसाधनों पर निर्भरता कम करके, यह पहल शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में दीर्घकालिक जल संरक्षण और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को मज़बूत करती है।
