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'कैरी मी बैक' पॉलिसी'कैरी मी बैक' पॉलिसी
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सन्दर्भ:

: रुद्रप्रयाग ज़िला प्रशासन ने चार धाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड संख्या के कारण बढ़ते कचरे के बोझ से निपटने के लिए केदारनाथ में ‘कैरी मी बैक’ पॉलिसी शुरू की है।

‘कैरी मी बैक’ पॉलिसी के बारे में:

  • ‘कैरी मी बैक’ पॉलिसी एक नया, समुदाय-आधारित कचरा प्रबंधन अभियान है, जिसे केदारनाथ नगर पंचायत के नेतृत्व में, ‘हीलिंग हिमालय फाउंडेशन’ और ‘सुलभ इंटरनेशनल’ के सहयोग से केदारनाथ में शुरू किया गया है।
  • इसका उद्देश्य:
    • पवित्र तीर्थस्थल के आस-पास प्लास्टिक और सूखे कचरे के जमाव को कम करना और इसकी पर्यावरणीय अखंडता को बनाए रखना।
    • जनभागीदारी के माध्यम से तीर्थयात्रियों को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदार बनाना।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • तीर्थयात्रियों के लिए कचरा जमा करने वाले बैग: तीर्थयात्रियों को विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए बैग दिए जाते हैं, जिनमें वे अपनी यात्रा के दौरान 400–500 ग्राम तक सूखा कचरा जमा करके रख सकते हैं।
    • कचरा वापसी परिवहन मॉडल: भक्तों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे जमा किए गए कचरे को वापस गौरीकुंड ले जाएं, जिससे ऊंचे पहाड़ों पर कचरे के निपटान से जुड़ी चुनौतियां कम हो सकें।
    • बहु-हितधारक सहयोग: ‘हीलिंग हिमालय फाउंडेशन’ बैग वितरित करता है, ‘सुलभ इंटरनेशनल’ कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान सुनिश्चित करता है, और ‘नगर पंचायत’ पूरे अभियान के कार्यान्वयन की देखरेख करती है।
    • हरित तीर्थयात्रा ढांचा: यह धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की भावना को भी जोड़ता है और टिकाऊ तीर्थयात्रा प्रथाओं को बढ़ावा देता है।
  • इसका महत्व:
    • यह भारत के सबसे अधिक पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में से एक में प्लास्टिक प्रदूषण और पर्यावरणीय गिरावट को कम करता है।
    • यह दर्शाता है कि नागरिकों की भागीदारी से बढ़ती तीर्थयात्रा पर्यटन गतिविधियों और दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण के बीच किस प्रकार संतुलन बनाया जा सकता है।

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By gkvidya

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