सन्दर्भ:
: कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने तिलहन की खेती के लिए भारत की पहली WhatsApp-आधारित AI एडवाइज़री सर्विस, ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ के देशव्यापी असर पर ज़ोर दिया है, क्योंकि किसान खरीफ़ की बुवाई के अहम मौसम में प्रवेश कर रहे हैं।
ऑयलसीड्स किसान मित्र के बारें में:
- ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ एक 24×7 चलने वाला, कई भाषाओं में उपलब्ध और AI-पावर्ड डिजिटल एडवाइज़री चैटबॉट है, जिसे सीधे WhatsApp के ज़रिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
- यह किसानों के लिए तुरंत और मुफ़्त वैज्ञानिक सलाह पाने का एक ज़रिया है। यह पारंपरिक किसानों को दशकों के सामूहिक कृषि शोध से जोड़ता है, और इसके लिए उन्हें कोई बाहरी मोबाइल ऐप डाउनलोड करने या मुश्किल इंटरनेट ब्राउज़र इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
- इसे ICAR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ऑयलसीड्स रिसर्च (ICAR-IIOR), हैदराबाद ने डेवलप किया है।
- इसे कैसे इस्तेमाल करें और यह कैसे काम करता है?
- यह प्लेटफ़ॉर्म हाई-टेक कृषि विस्तार सेवा को तीन आसान स्टेप्स में बदल देता है:
- स्टेप 1: किसान अपने स्मार्टफ़ोन पर ऑफ़िशियल कॉन्टैक्ट नंबर +91 4024598180 को ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ के नाम से सेव करते हैं।
- स्टेप 2: यूज़र WhatsApp खोलते हैं और अपनी स्थानीय भाषा में फ़सल से जुड़ा सवाल टाइप करते हैं, बोलकर बताते हैं या भेजते हैं।
- स्टेप 3: इसका AI इंजन तुरंत उस स्थानीय भाषा वाले टेक्स्ट को समझता है, उसे वेरिफ़ाइड वैज्ञानिक जानकारी के डेटाबेस से मिलाता है और साफ़-साफ़, शोध से प्रमाणित सलाह वापस भेजता है।
- यह प्लेटफ़ॉर्म हाई-टेक कृषि विस्तार सेवा को तीन आसान स्टेप्स में बदल देता है:
- इस प्लेटफ़ॉर्म की मुख्य विशेषताएं:
- तिलहन फसलों की व्यापक कवरेज: मूंगफली, सरसों, तिल, सूरजमुखी, सोयाबीन और नाइजर जैसी सभी प्रमुख घरेलू तिलहन फसलों के लिए सटीक और स्थान-विशिष्ट सलाह देता है।
- पूरी तरह से बहुभाषी सुविधा: इसमें नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) तकनीक है जो भारत की सभी आधिकारिक क्षेत्रीय भाषाओं (जैसे हिंदी, कन्नड़, गुजराती, तेलुगु और मलयालम) को समझती है और तुरंत जवाब देती है।
- फसल चक्र के हर चरण के लिए मार्गदर्शन: खेती की पूरी प्रक्रिया को कवर करता है:
- अधिक उपज देने वाली क्षेत्रीय किस्मों का चयन और प्रमाणित बीजों की उपलब्धता।
- खेती के लिए मिट्टी तैयार करना और बुवाई के तरीके।
- कीटों, खरपतवार और बीमारियों की पहचान और उनके नियंत्रण की रियल-टाइम जानकारी।
- सटीक सिंचाई का समय तय करना और ज़रूरत के हिसाब से खाद का इस्तेमाल।
- फसल कटाई के बाद प्रोसेसिंग, सुखाने और भंडारण के तरीके।
- कई संस्थानों के सहयोग से बना सिस्टम: इसका डेटाबेस अलग-थलग नहीं है; यह कई प्रमुख शोध संस्थानों के वैज्ञानिक शोध को एक साथ लाता है:
- ICAR-नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट, इंदौर (NSRI)
- ICAR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ग्राउंडनट रिसर्च, जूनागढ़ (IIGR)
- ICAR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रेपसीड एंड मस्टर्ड रिसर्च, भरतपुर (IIRMR)
- तिल और नाइजर के लिए प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटिंग यूनिट।
