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सन्दर्भ:

: फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) ने बड़े पैमाने पर हुए साइबर फ्रॉड से जुड़े अपने मामले के लिए एक और अहम अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की है और प्रतिष्ठित ‘बेस्ट एग्मोंट केस अवार्ड (BECA) 2026′ में रनर-अप का स्थान प्राप्त किया है।

FIU-IND के बारें में:

  • इसे भारत सरकार ने 2004 में बनाया था।
  • यह संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी जानकारी पाने, प्रोसेस करने, एनालाइज़ करने और फैलाने के लिए ज़िम्मेदार सेंट्रल नेशनल एजेंसी है।
  • FIU-IND एक इंडिपेंडेंट बॉडी है जो सीधे फाइनेंस मिनिस्टर की हेड वाली इकोनॉमिक इंटेलिजेंस काउंसिल (EIC) को रिपोर्ट करती है।
  • FIU-IND का काम:
    • जानकारी इकट्ठा करना: यह अलग-अलग रिपोर्टिंग एंटिटी से कैश ट्रांज़ैक्शन रिपोर्ट (CTRs), नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइज़ेशन ट्रांज़ैक्शन रिपोर्ट (NTRs), क्रॉस बॉर्डर वायर ट्रांसफर रिपोर्ट (CBWTRs), इम्मूवेबल प्रॉपर्टी की खरीद या बिक्री पर रिपोर्ट (IPRs) और संदिग्ध ट्रांज़ैक्शन रिपोर्ट (STRs) पाने के लिए सेंट्रल रिसेप्शन पॉइंट के तौर पर काम करता है।
    • जानकारी का एनालिसिस: मनी लॉन्ड्रिंग और उससे जुड़े क्राइम के शक वाले ट्रांज़ैक्शन के पैटर्न का पता लगाने के लिए मिली जानकारी का एनालिसिस करना।
    • जानकारी शेयर करना: यह नेशनल इंटेलिजेंस/लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों, नेशनल रेगुलेटरी अथॉरिटी और विदेशी फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ जानकारी शेयर करता है। सेंट्रल रिपॉजिटरी: यह रिपोर्टिंग एंटिटी से मिली रिपोर्ट के आधार पर एक नेशनल डेटाबेस बनाता है और उसे मेंटेन करता है।
    • कोऑर्डिनेशन: यह मनी लॉन्ड्रिंग और उससे जुड़े क्राइम से निपटने के लिए एक असरदार नेशनल, रीजनल और ग्लोबल नेटवर्क के ज़रिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस के कलेक्शन और शेयरिंग को कोऑर्डिनेट और मज़बूत करता है।
    • रिसर्च और एनालिसिस: मनी लॉन्ड्रिंग ट्रेंड, टाइपोलॉजी और डेवलपमेंट पर स्ट्रेटेजिक खास एरिया को मॉनिटर और पहचानना।

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By gkvidya

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