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पाँच भारतीय मोरपाँच भारतीय मोर
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सन्दर्भ:

: भारत ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOG) को पाँच भारतीय मोर भेंट किए जिनमें चार नीले मोर और एक दुर्लभ सफ़ेद पंखों वाला नर मोर शामिल था।

भारतीय मोर के बारे में:

  • भारतीय मोर (या इंडियन पीफाउल) तीतर परिवार (Phasianidae) का एक बड़ा और रंग-बिरंगा पक्षी है, 1963 में इसे भारत का राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया था।
  • भारतीय उपमहाद्वीप में इसका सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और पौराणिक महत्व बहुत अधिक है।
  • आवास और वितरण:
    • आवास: यह खुले मैदानी जंगलों, कांटेदार झाड़ियों, खेतों, घास के मैदानों और नदियों के किनारों पर रहता है। यह आसानी से ढलने वाला पक्षी है और अक्सर इंसानी बस्तियों, पार्कों और गांवों के बाहरी इलाकों में घूमता रहता है।
    • वितरण: यह दक्षिण एशिया (भारत, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान) का मूल निवासी है, लेकिन इसे दुनिया के कई अन्य क्षेत्रों में भी ले जाया गया है।
  • IUCN रेड लिस्ट: Least Concern (कम चिंता वाली श्रेणी)
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972: अनुसूची I
  • मुख्य विशेषताएं:
    • साफ़ तौर पर दिखने वाला लैंगिक अंतर: नर (मोर) का सिर और गर्दन चमकीले मैटेलिक-नीले रंग के होते हैं और उन पर पंखे के आकार की कलगी होती है, जबकि मादाएं (मोरनी) आकार में छोटी होती हैं और उनके पंख हल्के भूरे रंग के होते हैं, जो घोंसला बनाते समय उन्हें छिपने में मदद करते हैं।
    • चमकीले पंख और ‘ओसेली’ (आंख जैसे निशान): नर की खास पूंछ असल में पूंछ के ऊपर के लंबे पंखों का एक गुच्छा होती है, जिसमें 200 से ज़्यादा पंख होते हैं। इन पर चमकीले ‘ओसेली’ (आंख जैसे निशान) बने होते हैं, जिन्हें वे मादा को आकर्षित करने के लिए शानदार पंखे की तरह फैलाते हैं।
    • जेनेटिक रंग-रूप (सफेद मोर): हालांकि आम तौर पर इनका रंग कोबाल्ट नीला होता है, लेकिन जेनेटिक बदलावों (जैसे ल्यूसिज़्म) के कारण दुर्लभ, पूरी तरह सफेद पंखों वाले मोर भी पाए जाते हैं (इनकी आंखों में सामान्य पिगमेंट होता है, जो इन्हें एल्बिनो से अलग बनाता है)।
    • सर्वाहारी खान-पान और सोने की आदत: ये ज़मीन पर खाना खोजने वाले सर्वाहारी जीव हैं जो बीज, अनाज, कीड़े-मकोड़े, छोटे रेंगने वाले जीव और सांप के बच्चों (कोबरा सहित) को खाते हैं। शिकारियों से बचने के लिए ये रात में ऊंचे पेड़ों या ऊंची जगहों पर बड़े झुंड में सोते हैं।
    • ज़बरदस्त अनुकूलन क्षमता: ये अलग-अलग तरह के वातावरण में आसानी से ढल जाते हैं – चाहे वह सूखा, कम बारिश वाला मैदानी इलाका हो, नमी वाले उष्णकटिबंधीय जंगल हों या शहरों में मौजूद हरियाली वाली जगहें।
  • इसका महत्व:
    • यह भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और सुंदरता, विरासत और पर्यावरण के साथ तालमेल का प्रतीक है।
    • यह वैश्विक पहलों के ज़रिए जैव-विविधता के संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

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By gkvidya

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