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eVTOL एयरक्राफ़्टeVTOL एयरक्राफ़्ट
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सन्दर्भ:

: चेन्नई में हेडक्वार्टर वाले डीप-टेक स्टार्टअप ‘द ई-प्लेन कंपनी’ (जिसे IIT मद्रास में इनक्यूबेट किया गया है) ने भारत के पहले फुल-स्केल इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग एयरक्राफ्ट (eVTOL एयरक्राफ्ट) प्रोटोटाइप, e200X (PT-01) का अनावरण किया।

eVTOL एयरक्राफ़्ट के बारें में:

  • एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट– जिसे अक्सर इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी कहा जाता है- एक ज़ीरो-एमिशन, बैटरी से चलने वाला एयरक्राफ्ट है।
  • यह हेलीकॉप्टर की तरह वर्टिकली (सीधे ऊपर) टेक-ऑफ और लैंड करता है और फिर पारंपरिक हवाई जहाज़ की तरह आगे की ओर उड़ने लगता है।
  • किसने बनाया: e200X प्लेटफ़ॉर्म को The ePlane Company ने खुद ही इंजीनियर, डिज़ाइन और असेंबल किया है।
  • यह कैसे काम करता है?
    • वर्टिकल लिफ़्ट बनाम फॉरवर्ड फ़्लाइट: जटिल टिल्ट-रोटर डिज़ाइन के विपरीत, जिनमें इंजन को फिजिकली घुमाया जाता है, e200X अलग-अलग, खास प्रोपल्शन सेट का इस्तेमाल करता है: होवर/टेक-ऑफ के लिए छह वर्टिकल लिफ़्ट रोटर और क्रूज़ फ़्लाइट के लिए चार फॉरवर्ड प्रोपेलर।
    • डिस्ट्रीब्यूटेड इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (DEP): अगर उड़ान के दौरान कोई एक मोटर या प्रोपेलर खराब हो जाता है, तो बाकी मोटरें सुरक्षित रूप से नीचे उतरने या लैंड करने के लिए थ्रस्ट को अपने आप री-डिस्ट्रीब्यूट कर देती हैं, जिससे सिंगल-पॉइंट मैकेनिकल फ़ेलियर का खतरा खत्म हो जाता है।
    • पेटेंटेड सिनर्जिस्टिक लिफ़्ट आर्किटेक्चर: इसे एक पेटेंटेड विंग डिज़ाइन के साथ बनाया गया है जो कम एयरस्पीड पर भी एरोडायनामिक लिफ़्ट देता है। इससे एयरक्राफ्ट को बड़े और चौड़े विंगस्पैन की ज़रूरत के बिना भी स्टेबिलिटी बनाए रखने में मदद मिलती है।
    • एडवांस्ड एज कंप्यूट और सेंसर फ़्यूज़न: 800V हाई-वोल्टेज EV पावरट्रेन से चलने वाला यह एयरक्राफ्ट NVIDIA IGX Thor प्लेटफ़ॉर्म पर काम करता है। यह कैमरे, LiDAR और रडार से मिलने वाले रियल-टाइम डेटा को मिलाकर पायलट को भीड़-भाड़ वाले शहरी इलाकों में 360° व्यू देता है।
  • e200X की मुख्य विशेषताएं:
    • अल्ट्रा-कॉम्पैक्ट साइज़: इसका साइज़ सिर्फ़ 8 मीटर × 11 मीटर है। इस साइज़ की वजह से यह खास तौर पर बनाए गए वर्टीपोर्ट्स की ज़रूरत के बिना, मौजूदा हेलीपैड या अस्पताल की छतों से सीधे ऑपरेट हो सकता है।
    • कार्बन-फ़ाइबर कम्पोजिट स्ट्रक्चर: इसे हल्के कार्बन-फ़ाइबर कम्पोजिट से बनाया गया है और इसका अधिकतम ग्रॉस वेट 2 टन है।
    • पेलोड और ऑपरेटिंग रेंज: इसे 1 पायलट और 200 किलोग्राम पेलोड (जिसमें 2 यात्री या पैरामेडिक के साथ ट्रॉमा मरीज़ आ सकते हैं) ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। एक बार चार्ज करने पर इसकी रेंज 110 किलोमीटर है।
    • डिजिटल ट्विन वैलिडेशन: फिजिकली असेंबल करने से पहले इसे NVIDIA Omniverse का इस्तेमाल करके वर्चुअली डेवलप और टेस्ट किया गया है। साथ ही, सब-स्केल डेमोंस्ट्रेटर पर 10,000 किलोमीटर से ज़्यादा की फ़्लाइट टेस्टिंग भी की गई है।
  • मुख्य इस्तेमाल:
    • यह शहरी ट्रैफ़िक से बचते हुए गंभीर मरीज़ों, मेडिकल टीमों और उपकरणों को तेज़ी से लाने-ले जाने में मदद करता है।
    • यह तय रूट पर तेज़ी से एयरपोर्ट ट्रांसफर और शहरी लॉजिस्टिक्स में मदद करता है, जिससे यात्रा का समय काफ़ी कम हो जाता है।

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By gkvidya

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