सन्दर्भ:
: केंद्रीय श्रम मंत्री ने भारत की श्रम शक्ति के लिए सेवा और सम्मान को शासन और श्रमिकों के कल्याण के केंद्र में बताया है।
सेवा और सम्मान के बारे में:
- ‘सेवा’ और ‘सम्मान’ एक ऐसे वर्कर-सेंट्रिक (कामगार-केंद्रित) नैतिक गवर्नेंस अप्रोच को दिखाते हैं जो भारत के वर्कफोर्स की सेवा, गरिमा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में रखता है।
- यह ‘श्रम शक्ति’ (वर्कफोर्स) को सिर्फ़ एक आर्थिक इनपुट के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के एक अहम स्तंभ के तौर पर देखता है, जो गरिमा, सम्मान और व्यापक सामाजिक सुरक्षा का हकदार है।
- मुख्य विशेषताएं:
- श्रम की गरिमा: हर वर्कर पहचान और सम्मान का हकदार है; यह सभी तरह के ईमानदार श्रम की स्वाभाविक गरिमा को मान्यता देता है।
- देखभाल की नैतिकता: हेल्थकेयर और सामाजिक सुरक्षा, वर्कर्स को ऐसे इंसानों के तौर पर देखती है जिनकी आर्थिक उत्पादकता के अलावा शारीरिक, सामाजिक और पारिवारिक ज़रूरतें भी होती हैं।
- कमज़ोर वर्गों के लिए सुरक्षा: ESIC कवरेज का विस्तार हेल्थकेयर और सामाजिक सुरक्षा तक समान पहुँच को बढ़ावा देता है, जिससे सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलता है।
- आपसी सहयोग और साझा ज़िम्मेदारी: वर्कर्स, एम्प्लॉयर्स और सरकार के बीच सहयोग से अच्छे औद्योगिक संबंध और टिकाऊ राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा मिलता है।
- इसका महत्व:
- भारत का सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2014 में 19% से बढ़कर 64% से ज़्यादा हो गया है, जिसमें 94 करोड़ लोग शामिल हैं, जिससे आर्थिक और सामाजिक जोखिमों के खिलाफ़ सुरक्षा मज़बूत हुई है।
- विकास के केंद्र में वर्कर्स की गरिमा, स्वास्थ्य और कल्याण को रखकर, यह अप्रोच उत्पादकता, सामाजिक एकजुटता और ‘श्रमेव जयते’ तथा विकसित भारत के व्यापक विज़न को मज़बूत करता है।
