Fri. Jul 17th, 2026
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेनभारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
शेयर करें

सन्दर्भ:

: भारत के प्रधानमंत्री 17 जुलाई, 2026 को हरियाणा के जींद में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के बारें में:

  • यह ट्रेन एक अत्याधुनिक, ज़ीरो-एमिशन (बिना प्रदूषण वाली) हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (HEMU) है। इसे पुरानी डीज़ल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) रेक को मॉडर्न, साफ़ हाइड्रोजन फ्यूल सेल और लिथियम बैटरी प्रोपल्शन सिस्टम के साथ अपग्रेड करके बनाया गया है, जिससे पारंपरिक ओवरहेड बिजली के तारों या जीवाश्म ईंधन की ज़रूरत खत्म हो गई है।
  • किसने विकसित किया:
    • ₹136 करोड़ के इस पायलट प्रोजेक्ट को नॉर्दर्न रेलवे ने पूरा किया और इसके लिए उपकरण हैदराबाद की इंजीनियरिंग कंपनी मेधा सर्वो ड्राइव्स ने सप्लाई किए।
    • इसमें इस्तेमाल किए गए खास हाइड्रोजन फ्यूल सेल कनाडा की मशहूर कंपनी बैलार्ड पावर सिस्टम्स से मंगाए गए थे।
  • उद्देश्य: बिना बिजली वाले या कम दूरी वाले रेलवे ट्रैक पर आत्मनिर्भर, ग्रीन मास ट्रांज़िट कॉरिडोर बनाना है।
  • यह कैसे काम करती है?
    • केमिकल जनरेशन: ट्रेन में लगे फ्यूल सेल स्टोरेज टैंक से कंप्रेस्ड हाइड्रोजन लेते हैं और उसे बाहर की हवा से ली गई ऑक्सीजन के साथ मिलाते हैं। एक इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्शन से इलेक्ट्रॉन अलग होते हैं, जिससे बिजली बनती है और बाय-प्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ शुद्ध जल वाष्प और गर्मी निकलती है।
    • हाइब्रिड पावर स्प्लिटिंग: फ्यूल सेल एक स्थिर, बिना उतार-चढ़ाव वाला इलेक्ट्रिकल आउटपुट देता है। जब ट्रेन शुरू होती है या स्पीड बढ़ाती है और उसे ज़्यादा पावर की ज़रूरत होती है, तो इसमें लगी लिथियम फेरो फॉस्फेट (LFP) बैटरी अपने-आप चालू हो जाती है और फ्यूल सेल के साथ अतिरिक्त ऊर्जा देती है।
    • रीजेनरेटिव बैलेंसिंग: जब ट्रेन धीमी गति से चलती है या स्टेशन पर रुकने के लिए ब्रेक लगाती है, तो फ्यूल सेल से बनी अतिरिक्त बिजली अपने-आप LFP बैटरी को चार्ज करने में इस्तेमाल हो जाती है, जिससे यात्रा के आखिर तक बैटरी लगभग 80% चार्ज रहती है।
  • मुख्य ऑपरेशनल और टेक्निकल विशेषताएं:
  • ट्रेनसेट का बड़ा आकार: यह दुनिया के सबसे लंबे और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट में से एक है, जिसमें आठ पैसेंजर कोच और दो ड्राइविंग पावर कार हैं, जो कुल मिलाकर 2400 kW (3200 hp) का आउटपुट देते हैं।
  • कॉरिडोर पर परफॉर्मेंस: इसे हरियाणा में 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलाने के लिए प्रोग्राम किया गया है, जिसमें एक बार में 682 यात्री यात्रा कर सकते हैं।
    • यह रोज़ाना दो राउंड ट्रिप पूरी करेगी और इसकी अधिकतम ऑपरेशनल स्पीड 75 km/h होगी, जिसमें लगभग 300 किलोग्राम हाइड्रोजन की खपत होगी।
  • ज़्यादा क्षमता वाला ऑनबोर्ड स्टोरेज: हर ड्राइविंग पावर कार में एक मज़बूत स्टोरेज रैक होता है, जिसमें 200 से 500 बार के बहुत ज़्यादा दबाव पर कंप्रेस की गई 440 किलोग्राम हाइड्रोजन रखी जाती है।
  • जींद में फ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: फ्यूलिंग की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, रेलवे ने जींद में 3,000 किलोग्राम क्षमता वाला एक खास हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन बनाया है।
    • इस स्टेशन में एक एडवांस्ड चिलर प्लांट लगा है जो गैस को -15 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करके उसे घने लिक्विड में बदल देता है, ताकि ट्रैक के पास तेज़ी से और सुरक्षित रूप से फ्यूल भरा जा सके।

शेयर करें

By gkvidya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *