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UDISE रिपोर्ट 2025–26UDISE रिपोर्ट 2025–26
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सन्दर्भ:

: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए ‘यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस’ (UDISE रिपोर्ट 2025–26) पर विस्तृत रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर जारी की।

UDISE रिपोर्ट 2025–26 के बारें में:

  • ‘यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस’ (UDISE+) दुनिया के सबसे बड़े मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम में से एक है। यह पूरे भारत में 14.8 लाख से ज़्यादा स्कूलों, 1.02 करोड़ शिक्षकों और 26 करोड़ से ज़्यादा छात्रों से जुड़ी जानकारी को कवर करता है।
  • ‘स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग’ के तहत स्कूली शिक्षा के लिए सटीक और भरोसेमंद डेटा के मुख्य स्रोत के तौर पर काम करते हुए, यह सरकार के लिए एक बुनियादी एनालिटिकल इंजन की भूमिका निभाता है। इसके ज़रिए सरकार शिक्षा से जुड़े पैमानों पर नज़र रखती है, वित्तीय संसाधन आवंटित करती है और ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (NEP) के अनुरूप नीतियों में ज़रूरी सुधार करती है।
  • 2025-26 की रिपोर्ट के मुख्य संकेतक और तथ्य:
    • स्कूल छोड़ने की दर में बड़ी कमी: स्कूल छोड़ने की दरों में सभी मुख्य स्तरों पर कमी आई है; तैयारी के स्तर (preparatory-level) पर यह दर घटकर 8% और माध्यमिक स्तर (secondary-level) पर 7.0% हो गई है, जो छात्रों के स्कूल में बने रहने (retention) में सुधार को दिखाता है।
    • छात्रों के स्कूल में बने रहने की दर में सुधार और GER में बढ़ोतरी: मिडिल और सेकेंडरी दोनों स्तरों पर छात्रों के स्कूल में बने रहने की दर में सुधार हुआ है, जबकि सेकेंडरी स्तर पर ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (GER) बढ़कर 7% हो गया है, जो स्कूलिंग तक बेहतर पहुँच को दर्शाता है।
    • छात्रों के एक स्तर से दूसरे स्तर पर जाने (transition) की दर में सुधार: छात्र स्कूल के अलग-अलग स्तरों के बीच आसानी से आगे बढ़ रहे हैं; फाउंडेशनल से तैयारी, मिडिल और सेकेंडरी शिक्षा तक जाने की दरों में सुधार हुआ है, जिससे शिक्षा में रुकावट कम हुई है।
    • बेहतर छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR): शिक्षकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे PTR, NEP के 30:1 के मानक से काफी नीचे आ गया है; इससे क्लासरूम में बेहतर ध्यान देने और सीखने के बेहतर नतीजे पाने में मदद मिली है।
    • कमज़ोर संस्थानों को मिलाना (Consolidation): रैशनलाइज़ेशन के ज़रिए अकेले शिक्षक वाले और ज़ीरो-एनरोलमेंट वाले स्कूलों की संख्या में कमी आई है, जिससे पूरे स्कूल सिस्टम में संसाधनों के इस्तेमाल और प्रशासनिक दक्षता में सुधार हुआ है।
    • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: अब ज़्यादा स्कूलों में कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्टिविटी है, जिससे डिजिटल लर्निंग, ऑनलाइन रिसोर्स और टेक्नोलॉजी-आधारित क्लासरूम शिक्षा मज़बूत हुई है।
    • बुनियादी स्वच्छता और जेंडर से जुड़े आँकड़े: अब लगभग सभी स्कूलों में बिजली, पीने का पानी और काम करने लायक टॉयलेट की सुविधा है, और महिलाएँ शिक्षकों में बहुमत में हैं, जो जेंडर-समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देता है।

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By gkvidya

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