सन्दर्भ:
: हाल ही में, भारत को पहली बार फाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) के उपाध्यक्ष पद के लिए चुना गया है।
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के बारे में:
- यह एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग से वैश्विक वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा के लिए नीतियां बनाती है और उन्हें बढ़ावा देती है।
- स्थापना:
- इसकी स्थापना 1989 में पेरिस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर बढ़ती चिंता के जवाब में की गई थी।
- 2001 में, इसके दायरे को बढ़ाकर इसमें आतंकवाद के लिए फंडिंग को भी शामिल किया गया।
- मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस।
- सदस्य: FATF के सदस्यों में 40 देश शामिल हैं, जिनमें अमेरिका, भारत, चीन, सऊदी अरब, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और खुद EU शामिल हैं।
- भारत 2010 में FATF का सदस्य बना।
- इसके अलावा, दुनिया भर के 200 से अधिक अधिकार-क्षेत्रों (jurisdictions) ने FSRB और FATF सदस्यता के वैश्विक नेटवर्क के माध्यम से FATF की सिफारिशों को मानने का संकल्प लिया है।
- FATF नियमित रूप से ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित करता है जो मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी फंडिंग और प्रसार फंडिंग (proliferation financing) के नवीनतम तरीकों के बारे में जागरूकता बढ़ाती हैं।
- एक बार सदस्य बनने के बाद, किसी देश या संगठन को FATF की नवीनतम सिफारिशों का समर्थन करना होता है और अन्य सदस्यों द्वारा मूल्यांकन किए जाने (और दूसरों का मूल्यांकन करने) के लिए प्रतिबद्ध होना पड़ता है।
- FATF उन देशों को जवाबदेह ठहराता है जो FATF मानकों का पालन नहीं करते हैं।
- यदि कोई देश बार-बार FATF मानकों को लागू करने में विफल रहता है, तो उसे ग्रे और ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है।
- FATF की सिफारिशों को वैश्विक एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और काउंटर-टेररिस्ट फाइनेंसिंग (CFT) मानक के रूप में मान्यता प्राप्त है।
