सन्दर्भ:
: किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण को लेकर आठ साल से चला आ रहा गतिरोध हाल ही में तब खत्म हुआ, जब केंद्र और इससे लाभान्वित होने वाले राज्य परियोजना के बिजली वाले हिस्से की ₹2,000 करोड़ की लागत उठाने पर सहमत हो गए।
किशाऊ बांध परियोजना के बारे में:
- यह एक बहुउद्देशीय बांध परियोजना है जिसे उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर टोंस नदी (यमुना नदी की एक प्रमुख सहायक नदी) पर बनाने का प्रस्ताव है।
- लाभार्थी राज्य: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश।
- इस परियोजना में कंक्रीट का बांध बनाने की योजना है, जिससे 4 x 165 MW (660 MW) की जलविद्युत क्षमता पैदा होगी, 97,000 हेक्टेयर में सिंचाई की क्षमता बनेगी, और दिल्ली, राजस्थान तथा हरियाणा को सालाना 517 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी की आपूर्ति होगी।
- यह यमुना में ताजे पानी के बहाव को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा, खासकर पानी की कमी वाले मौसम में।
- इस परियोजना के निर्माण के लिए, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सरकार के संयुक्त उद्यम के तौर पर 2017 में ‘किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ का गठन किया गया है।
- हालिया सहमति:
- परियोजना के तहत, पानी से जुड़े हिस्से के लिए 90 प्रतिशत फंड केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के तौर पर देगी और बाकी 10 प्रतिशत खर्च छह लाभार्थी राज्य उठाएंगे।
- हिमाचल प्रदेश के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा, बदले में वे हिमाचल प्रदेश के हिस्से की बिजली परियोजना की लागत में अपना योगदान देंगे।
