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4th लैवेंडर महोत्सव4th लैवेंडर महोत्सव
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सन्दर्भ:

: CSIR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (IIIM), जम्मू, ”Lavender goes global” थीम के तहत 4th लैवेंडर महोत्सव का आयोजन करने जा रहा है।

4th लैवेंडर महोत्सव के बारें में:

  • लैवेंडर महोत्सव एक राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा है।
  • यह लैवेंडर क्रांति पहल के तहत लैवेंडर की खेती का एक प्रमुख केंद्र बन गया है।
  • इसका आयोजन भदेरवाह, डोडा में 6-7 जून को “लैवेंडर गोज ग्लोबल” थीम के तहत किया जा रहा है।
  • इस वर्ष के महोत्सव में देश भर के वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स, सुगंध उद्योगों, उद्यमियों, नीति निर्माताओं, कृषि-व्यवसाय हितधारकों, छात्रों, प्रगतिशील किसानों और सुगंध एवं स्वास्थ्य कंपनियों के प्रतिनिधियों की उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिलेगी।
  • इस कार्यक्रम में स्टार्टअप प्रदर्शनियां, लाइव प्रदर्शन, खरीदार-विक्रेता संवाद, तकनीकी सत्र, किसान-उद्योग नेटवर्किंग और स्थानीय उद्यमियों और स्टार्टअप द्वारा विकसित मूल्यवर्धित लैवेंडर और सुगंधित उत्पादों का प्रदर्शन शामिल होगा।
  • इस कार्यक्रम में लैवेंडर की खेती, कटाई उपरांत प्रबंधन, आवश्यक तेल निष्कर्षण, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात के अवसरों पर तकनीकी चर्चाएं भी शामिल होंगी।
  • कार्यक्रम के दौरान “लैवेंडर फेस्टिवल 2026” का वेब पोर्टल लॉन्च किया गया और लैवेंडर फेस्टिवल ब्रोशर भी जारी किया गया।

लैवेंडर की खेती के बारे में:

  • लैवंडुला (आम नाम लैवेंडर) पुदीना परिवार, लैमिएसी के फूलों वाले पौधों की 47 ज्ञात प्रजातियों का एक वंश है।
  • यह एक छोटा, बारहमासी, सुगंधित जड़ी-बूटी वाला पौधा है।
  • दिखावट: जंगली प्रजातियों में फूल नीले, बैंगनी या हल्के बैंगनी रंग के हो सकते हैं; कभी-कभी वे काले-बैंगनी या पीले रंग के भी होते हैं।
  • ये फूल समशीतोष्ण (ठंडे) क्षेत्रों में उगते हैं और सूखे को सहन करने वाली फसलें हैं।
  • लैवेंडर का एक पौधा 15 साल तक फूल देता है, इसकी देखभाल में बहुत कम मेहनत लगती है, और दूसरे साल से ही इसकी कटाई की जा सकती है।
  • यह मूल रूप से यूरोप की फसल है, लेकिन CSIR अरोमा मिशन के ज़रिए इसे जम्मू और कश्मीर राज्य के समशीतोष्ण क्षेत्रों में लाया गया।
  • प्रसार: लैवेंडर का प्रसार बीजों, जड़ वाली कलमों, ऊतक संवर्धन (tissue culture) और लेयरिंग (कलम लगाने) के तरीकों से किया जा सकता है।
  • आवश्यक जलवायु परिस्थितियाँ:
    • जलवायु: यह एक मज़बूत और समशीतोष्ण पौधा है जो सूखे और पाले की स्थितियों को सहन कर सकता है। इसके लिए आदर्श जलवायु परिस्थितियाँ ठंडी सर्दियाँ और ठंडी गर्मियाँ हैं।
    • इसे अच्छी मात्रा में धूप की आवश्यकता होती है।
    • मिट्टी: यह हल्की, हवादार और जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टी में अच्छी तरह उग सकता है। यह उदासीन (neutral) से लेकर क्षारीय (alkaline) मिट्टी में सबसे अच्छा उगता है, जिसमें पानी आसानी से निकल जाता हो।
      • यह जलभराव (पानी जमा होने) के प्रति बहुत संवेदनशील होता है, हालाँकि यह खराब या कटी-फटी मिट्टी में भी अच्छी तरह उग सकता है।
    • वर्षा: यह प्रति वर्ष 300 से 1400 मिमी की वार्षिक वर्षा सीमा में अच्छा उत्पादन दे सकता है।
  • उपयोग: भोजन और स्वाद बढ़ाने के लिए, दवा और चिकित्सा के लिए, सौंदर्य प्रसाधनों के लिए, और औद्योगिक उद्देश्यों आदि के लिए।

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By gkvidya

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