Sat. May 16th, 2026
प्रोजेक्ट गरुड़प्रोजेक्ट गरुड़
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सन्दर्भ:

: हैदराबाद स्थित ध्रुव स्पेस ने हाल ही में ‘प्रोजेक्ट गरुड़’ को आगे बढ़ाने के लिए ‘रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड’ (RDIF) के तहत ₹105 करोड़ हासिल किए हैं।

प्रोजेक्ट गरुड़ के बारें में:

  • यह भारत की निजी क्षेत्र की उपग्रह क्षमताओं को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
  • यह हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप ‘ध्रुव स्पेस’ द्वारा शुरू किया गया एक सैटेलाइट प्लेटफॉर्म प्रोग्राम है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य: 500 किलोग्राम श्रेणी का एक ‘फ्लैट-पैक’ सैटेलाइट प्लेटफॉर्म विकसित करना है, जिसे बड़े पैमाने पर और अधिक संख्या में उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इसे छोटे प्रायोगिक सैटेलाइटों और बड़े पारंपरिक सिस्टमों के बीच की खाई को पाटने के लिए तैयार किया गया है।
  • इस प्लेटफॉर्म को एक मानकीकृत (standardised) और उत्पादन-उन्मुख अंतरिक्ष यान के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो कई अलग-अलग मिशनों को सहायता देने में सक्षम होगा।
  • इस सैटेलाइट आर्किटेक्चर का लक्ष्य दूरसंचार, राष्ट्रीय सुरक्षा, पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) और डेटा-आधारित उभरते हुए उपयोग के क्षेत्रों में अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है।
  • यह प्लेटफॉर्म एक ‘फ्लैट-पैक आर्किटेक्चर’ पेश करता है, जो लॉन्च के समय सैटेलाइटों को कुशलतापूर्वक एक के ऊपर एक व्यवस्थित करने (stacking), सिस्टम को तेज़ी से एकीकृत करने और परिनियोजन (deployment) की समय-सीमा को बेहतर बनाने में मदद करता है; जिससे यह बड़े पैमाने पर सैटेलाइटों को अंतरिक्ष में स्थापित करने के लिए उपयुक्त बन जाता है।
  • ध्रुव स्पेस बड़े पैमाने पर सैटेलाइटों के उत्पादन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा, उपकरण और औद्योगिक प्रक्रियाएं भी स्थापित करेगा।
  • इसके उत्पादन की रूपरेखा (roadmap) इस तरह से तैयार की गई है कि यह प्रतिदिन दो सैटेलाइटों तक के उत्पादन को संभव बना सके; जिसका अर्थ है कि इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 500-600 सैटेलाइटों की होगी।

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By gkvidya

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