सन्दर्भ:
: केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड (KSBB) ने हाल ही में स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों के सहयोग से पवित्र उपवन (Sacred Grove) के लिए एक प्रायोगिक जीर्णोद्धार कार्यक्रम शुरू किया है।
पवित्र उपवन के बारें में:
- पवित्र उपवन में प्राकृतिक वनस्पति के ऐसे हिस्से होते हैं – जिनमें कुछ पेड़ों से लेकर कई एकड़ तक का इलाका शामिल हो सकता है – जो स्थानीय देवी-देवताओं या वृक्ष-आत्माओं को समर्पित होते हैं।
- इन जगहों की सुरक्षा स्थानीय समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के कारण करते हैं, जो कई पीढ़ियों से चले आ रहे हैं।
- ये प्रकृति संरक्षण के सबसे कीमती और प्राचीन तरीकों में से कुछ हैं।
- ये जैव विविधता के भंडार के रूप में काम करते हैं, जहाँ पौधों और जानवरों की दुर्लभ प्रजातियों को आश्रय मिलता है।
- यहाँ आमतौर पर शिकार करना और पेड़ों की कटाई करना मना होता है, जबकि शहद इकट्ठा करना या सूखी लकड़ियाँ बीनना जैसी टिकाऊ गतिविधियाँ करने की अनुमति होती है।
- भारत में पवित्र उपवनों की कुल संख्या 1,00,000 से भी ज़्यादा है।
- ये उपवन पूरे देश में अलग-अलग स्थानीय नामों और उनसे जुड़े देवी-देवताओं के साथ पाए जाते हैं।
- ये खास तौर पर इन इलाकों में पाए जाते हैं:
- पश्चिमी घाट
- हिमालय
- पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाके
- मध्य भारत
- पवित्र उपवनों के क्षेत्रीय नाम:
- हिमाचल प्रदेश में देव वन
- उत्तराखंड में बुग्याल या देव वन
- असम में थान और मडाइको
- छत्तीसगढ़ में मातागुड़ी, देवगुड़ी या सरना
- झारखंड में जाहेरथान या सरना
- कर्नाटक में देवरकाडु
- केरल में कावु या सर्प कावु
- तमिलनाडु में कोविलकाडु
- महाराष्ट्र में देवराई या देवगुड़ी
- मेघालय में लॉ क्यनतांग या असोंग खोसी
- राजस्थान में ओरान
- ओडिशा में जाहेरा या ठाकुरम्मा
