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रु-सोम स्वदेशी इंजीनियरिंगरु-सोम स्वदेशी इंजीनियरिंग
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सन्दर्भ:

: UNESCO और सिक्किम सरकार ने लेपचा समुदाय की रु-सोम स्वदेशी इंजीनियरिंग पद्धतियों को व्यवस्थित रूप से प्रलेखित करने के लिए साझेदारी की है।

रु-सोम स्वदेशी इंजीनियरिंग के बारें में:

  • ‘रु-सोम’ (Ru-Soam) सिक्किम में लेपचा समुदाय द्वारा बनाए गए बेंत और बांस के पारंपरिक पैदल पुलों को कहते हैं, जो विशेष रूप से कंचनजंगा बायोस्फीयर रिज़र्व के भीतर पाए जाते हैं।
  • ये संरचनाएँ स्थानीय लोगों की रचनात्मकता का जीवंत उदाहरण हैं, जिन्हें पूरी तरह से स्थानीय रूप से उपलब्ध और नवीकरणीय सामग्रियों से तैयार किया जाता है।
  • उत्पत्ति: इंजीनियरिंग की इस पद्धति की शुरुआत लेपचा लोगों द्वारा हुई थी, जो सुदूर ‘ज़ोंगू’ क्षेत्र के प्राचीन मूल निवासी हैं।
  • इसका उद्देश्य:
    • क्षेत्रीय अनुसंधान और तकनीकी आकलन के माध्यम से संरचनाओं के पर्यावरणीय और इंजीनियरिंग सिद्धांतों का विश्लेषण करना।
    • आपदा-संभावित क्षेत्रों में समकालीन जलवायु अनुकूलन और सुदृढ़ अवसंरचना नियोजन के लिए उनकी प्रासंगिकता का मूल्यांकन करना।
  • मुख्य संरचनात्मक विशेषताएं:
    • Ru-Soam पुल इंजीनियरिंग के ऐसे अजूबे हैं जो स्टील या कंक्रीट जैसे ज़्यादा कार्बन वाले पदार्थों का इस्तेमाल किए बिना, आधुनिक सस्पेंशन पुलों के सिद्धांतों को दर्शाते हैं।
      • मुख्य सहारा (Soamgyang): दो समानांतर बेंत मुख्य केबल का काम करते हैं, जो ऊपर से पड़ने वाले भार को संभालते हैं। इन्हें दोनों सिरों पर बड़े पेड़ों से बांधा जाता है; ये पेड़ पुल को हवा में लटकाए रखने के लिए टावर का काम करते हैं।
      • सस्पेंडर लूप (Ahool): बेंत के बने झूलते हुए लूप मुख्य केबल को पुल के डेक से जोड़ते हैं; ये आधुनिक इंजीनियरिंग में इस्तेमाल होने वाले सस्पेंडर केबल की तरह ही काम करते हैं।
      • पुल का डेक (Soamgur): चलने वाली सतह बांस से बनी होती है, जो पैदल चलने वालों के लिए एक हल्का, फिर भी मज़बूत प्लेटफॉर्म देती है।
      • लचीलापन और मज़बूती: बांस के बने आड़े ब्रेसेस और रेलिंग पुल को लंबाई में लचीलापन देते हैं, जबकि बांस के सीधे खंभे (स्ट्रट्स) पुल को मोड़ने पर मज़बूती देते हैं और ब्रेसेस को नीचे झुकने से रोकते हैं।
      • सामग्री की विशेषताएं: मुख्य रूप से ‘महलू’ और ‘पोडियांग’ जैसी बांस की प्रजातियों से बनी ये संरचनाएं, बांस की ‘ग्रीन स्टील’ जैसी खूबियों का फ़ायदा उठाती हैं—जैसे कि इसकी बहुत ज़्यादा खिंचाव-क्षमता (औसतन 225 MPa), टिकाऊपन और जंग-रोधी गुण।
      • आयाम (Dimensions): ये पैदल पुल 100 मीटर तक लंबे हो सकते हैं, और आम तौर पर एक ही समय में पुल पार कर रहे दो या तीन लोगों का वज़न आसानी से उठा सकते हैं।
  • इसका महत्व:
    • स्टील या कंक्रीट के विपरीत, बांस और बेंत का कार्बन फुटप्रिंट बहुत कम होता है और इन्हें दोबारा उगने में केवल 3–5 साल लगते हैं, जिससे ये बुनियादी ढांचे के लिए एक नवीकरणीय संसाधन बन जाते हैं।
    • अपने हल्केपन और लचीलेपन के कारण, बांस से बनी संरचनाएं अक्सर भूकंपीय तरंगों से होने वाले विरूपण के प्रति कंक्रीट की तुलना में अधिक प्रतिरोधी होती हैं।

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By gkvidya

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