सन्दर्भ:
: सागरमाला कार्यक्रम के तहत ₹6.06 लाख करोड़ की लागत वाली 845 परियोजनाएँ कार्यान्वित की जा रही हैं, जिनमें से ₹1.57 लाख करोड़ की 315 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं।
सागरमाला कार्यक्रम के बारें में:
- इसे 2015 में बंदरगाह-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था।
- इसका उद्देश्य– मौजूदा सड़क और रेल नेटवर्क के साथ-साथ तटीय शिपिंग और अंतर्देशीय जलमार्गों के उपयोग को बढ़ाकर लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करना, परिवहन लागत को कम करना और व्यापार को समर्थन देना है।
- सागरमाला कार्यक्रम के तहत आने वाली कुल परियोजनाओं को 5 स्तंभों और 24 घटकों में विभाजित किया गया है।
- सागरमाला कार्यक्रम के घटक:
- बंदरगाहों का आधुनिकीकरण और नए बंदरगाहों का विकास: इसका मुख्य ध्यान मौजूदा बंदरगाहों को उन्नत करने और नए बंदरगाहों को विकसित करने पर है, ताकि उनकी क्षमता का विस्तार किया जा सके और परिचालन दक्षता में सुधार लाया जा सके।
- बंदरगाहों की कनेक्टिविटी में सुधार: इसका उद्देश्य बंदरगाहों और उनके भीतरी इलाकों (hinterland) के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करना है, ताकि माल की आवाजाही को अधिक तेज़ और लागत-प्रभावी बनाया जा सके।
- बंदरगाह-आधारित औद्योगीकरण: यह बंदरगाहों के निकटवर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक समूहों के विकास को बढ़ावा देता है, ताकि विनिर्माण और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिल सके।
- तटीय समुदायों का विकास: इसका मुख्य ध्यान तटीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका में सुधार करने और सतत विकास को बढ़ावा देने पर है।
- तटीय शिपिंग और अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन: यह माल की आवाजाही के लिए तटीय शिपिंग और अंतर्देशीय जलमार्गों के अधिक से अधिक उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
- सागरमाला का संस्थागत ढाँचा:
- इसे एक बहु-स्तरीय ढाँचे का समर्थन प्राप्त है, जिसे केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित योजना, कुशल कार्यान्वयन और निरंतर निगरानी को सक्षम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- राष्ट्रीय सागरमाला शीर्ष समिति (NSAC): मई 2015 में गठित, NSAC इस कार्यक्रम के लिए समग्र नीतिगत मार्गदर्शन और निगरानी प्रदान करने वाली शीर्ष संस्था है।
- समुद्री राज्य विकास परिषद (MSDC): केंद्र-राज्य समन्वय को सुगम बनाने के लिए इसकी बैठकें समय-समय पर आयोजित की जाती हैं। यह सभी हितधारकों को एक साथ लाती है और बंदरगाहों तथा संबंधित बुनियादी ढाँचे के समन्वित विकास को बढ़ावा देती है।
- राज्य सागरमाला समितियाँ (SSCs): तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) में गठित, SSCs राज्य स्तर पर परियोजनाओं की पहचान करने, कार्यान्वयन में समन्वय स्थापित करने और प्रगति की निगरानी करने के लिए जिम्मेदार हैं।
- सागरमाला वित्त निगम लिमिटेड (SMFCL): अगस्त 2016 में स्थापित सागरमाला विकास कंपनी लिमिटेड (SDCL) ने भारत के समुद्री बुनियादी ढाँचे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- जून 2025 में, SDCL का पुनर्गठन करके इसे सागरमाला वित्त निगम लिमिटेड (SMFCL) के रूप में परिवर्तित कर दिया गया।
