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वुलर झीलवुलर झील
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सन्दर्भ:

: कश्मीर की वुलर झील में संरक्षण प्रयासों के तहत 5 वर्ग किलोमीटर गाद वाली ज़मीन को फिर से हासिल किया गया है, विलो के पेड़ों को हटाया गया है, और झील के किनारों को मज़बूत किया गया है, ताकि इसकी पारिस्थितिक अखंडता और बाढ़-रोधी क्षमता को बढ़ाया जा सके।

वुलर झील के बारे में:

  • यह भारत की सबसे बड़ी ताज़े पानी की झील है और एशिया की दूसरी सबसे बड़ी ताज़े पानी की झील है।
  • अवस्थिति:
    • यह जम्मू और कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले में स्थित है।
    • यह कश्मीर घाटी के उत्तरी छोर पर स्थित है।
    • यह झील हरमुख पर्वत की तलहटी में स्थित है।
  • यह झील झेलम नदी के बहाव को नियंत्रित करती है, जो इसके बीच से होकर बहती है।
  • इस झील का बेसिन टेक्टोनिक हलचल के कारण बना था।
  • इसे प्राचीन काल में मौजूद सतीसर झील का बचा हुआ हिस्सा भी माना जाता है।
  • इस झील के बीच में एक छोटा सा द्वीप भी है, जिसे ‘ज़ैना लंक’ कहा जाता है।
  • इस द्वीप का निर्माण राजा ज़ैनुल-आबिदीन ने करवाया था।
  • यह मछलियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास है और कश्मीर घाटी में मछली उत्पादन में लगभग 60 प्रतिशत का योगदान देती है।
  • 1990 में, इसे रामसर कन्वेंशन के तहत ‘अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि’ (Wetland of International Importance) घोषित किया गया था।

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By gkvidya

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