सन्दर्भ:
: भारत ने अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिदमन को शामिल करके अपनी समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को काफी मज़बूत किया है।
INS अरिदमन के बारें में:
- INS अरिदमन, अरिहंत-श्रेणी की परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBN) में तीसरी पनडुब्बी है।
- यह एक बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जिसका अर्थ है कि इसे विशेष रूप से पानी के नीचे से परमाणु-युक्त बैलिस्टिक मिसाइलों को ले जाने और लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह एक विश्वसनीय ‘सेकंड-स्ट्राइक’ (जवाबी हमला) क्षमता प्रदान करती है।
- किसने विकसित किया: इस पनडुब्बी को ‘एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल’ (ATV) परियोजना के तहत विकसित किया गया था।
- इसका उद्देश्य:
- ज़मीन, हवा और समुद्र तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार लॉन्च करने की भारत की क्षमता को और मज़बूत करना।
- भारत के ‘नो फर्स्ट यूज़’ (पहले इस्तेमाल न करने) के परमाणु सिद्धांत के अनुरूप, जवाबी हमला करने की सुनिश्चित क्षमता सुनिश्चित करना।
- हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति का मुकाबला करना।
- INS अरिदमन की मुख्य विशेषताएं:
- विस्थापन: 7,000 टन का एक विशाल जहाज़, जो इसे INS अरिहंत से काफ़ी बड़ा बनाता है।
- बेहतर मारक क्षमता: आठ वर्टिकल लॉन्च ट्यूब से लैस, जो मुख्य जहाज़ की क्षमता को दोगुना कर देता है।
- मिसाइल की बहुमुखी प्रतिभा: यह या तो आठ K-4 SLBM (3,500 km की रेंज) या 24 K-15 SLBM (750 km की रेंज) तक ले जा सकता है।
- प्रणोदन: 83 MW के प्रेशराइज़्ड लाइट-वॉटर न्यूक्लियर रिएक्टर से संचालित, जो इसे महीनों तक पानी के नीचे और बिना किसी की नज़र में आए रहने में सक्षम बनाता है; इसकी सीमा केवल चालक दल के लिए उपलब्ध सामग्री तक ही सीमित है।
- तकनीकी छलांग: पिछले मॉडलों की तुलना में इसमें ज़्यादा उन्नत सोनार, संचार प्रणालियाँ और स्वदेशी स्टील्थ तकनीकें शामिल हैं।
- इसका महत्व:
- एक परमाणु-संचालित पनडुब्बी होने के नाते, पानी के नीचे रहते हुए इसका पता लगाना लगभग असंभव है; यह सुनिश्चित करता है कि यदि किसी ‘पहले हमले’ (first strike) में भारत के ज़मीनी और हवाई अड्डे नष्ट भी हो जाते हैं, तब भी भारत जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहेगा।
- इसके बेड़े में शामिल होने से भारत उन चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) के समूह में शामिल हो गया है, जो ‘परमाणु त्रय’ (nuclear triad) को डिज़ाइन करने और संचालित करने की क्षमता रखते हैं।
- भारत के अन्य परमाणु बेड़े
- INS अरिहंत: पहला स्वदेशी SSBN, जिसे 2016 में कमीशन किया गया था, और जिसने परमाणु त्रय (Nuclear Triad) की स्थापना की।
- INS अरिघाट: दूसरा अरिहंत-श्रेणी का SSBN, जिसे 2024 में कमीशन किया गया, जिसमें उन्नत डिज़ाइन और स्वदेशी K-15 मिसाइलें शामिल हैं।
- SSN कार्यक्रम: भारत परमाणु-संचालित हमलावर पनडुब्बियों (SSNs) पर भी काम कर रहा है और 2027-28 तक रूस से एक पनडुब्बी लीज़ पर लेने की उम्मीद करता है।
