सन्दर्भ:
: हाल ही में, भारतीय संरक्षणवादी बरखा सुब्बा और परवीन शेख ने हिमालयी सैलामैंडर और लुप्तप्राय इंडियन स्किमर के संरक्षण के लिए व्हिटली पुरस्कार जीते।
व्हिटली अवार्ड्स के बारे में:
- इसे अक्सर “ग्रीन ऑस्कर” कहा जाता है।
- यह ग्लोबल साउथ में ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले संरक्षण नेताओं को पहचान देता है।
- यह UK की चैरिटी संस्था, व्हिटली फंड फॉर नेचर (WFN) द्वारा दिया जाता है।
- यह विजेताओं को एक साल के लिए प्रोजेक्ट फंडिंग के तौर पर £50,000 देता है, ताकि वे जैव विविधता के नुकसान को रोकने के लिए स्थानीय उपायों को बड़े पैमाने पर लागू कर सकें।
हिमालयन सैलामैंडर के बारे में मुख्य तथ्य:
- यह छिपकली जैसी एक उभयचर प्रजाति है।
- हालांकि यह छिपकली जैसी दिखती है, लेकिन इसके शरीर पर शल्क (scales) नहीं होते।
- वितरण: यह भारत (दार्जिलिंग क्षेत्र), नेपाल और भूटान में ही पाई जाने वाली एक स्थानिक प्रजाति है।
- सैलामैंडर प्रजनन और अंडे देने के लिए अपनी जन्मस्थली पर लौटते हैं- इस प्रक्रिया को ‘फिलोपेट्री’ कहा जाता है, जिसके कारण वे अपने आवास और आर्द्रभूमि (wetland) के स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
- सांस्कृतिक महत्व: जिन आर्द्रभूमियों में हिमालयन सैलामैंडर प्रजनन करते हैं, वे सांस्कृतिक रूप से पूजनीय जल निकाय हैं, जो स्थानीय देवी-देवताओं और रीति-रिवाजों से जुड़े हुए हैं।
- संरक्षण स्थिति: IUCN: सुभेद्य (Vulnerable)
इंडियन स्किमर के बारे में मुख्य तथ्य:
- यह उन तीन प्रजातियों में से एक है जो ‘लारिडे’ (Laridae) परिवार के ‘स्किमर’ वंश (genus) ‘रिंकोप्स’ (Rynchops) से संबंधित हैं।
- इसका नाम इसके भोजन करने के तरीके के आधार पर पड़ा है; यह पानी की सतह के बहुत करीब उड़ते हुए मछलियों को ‘स्किम’ (पकड़ती) है।
- आवास: यह मुख्य रूप से बड़ी, रेतीली और निचले इलाकों में बहने वाली नदियों, झीलों के आसपास और उनसे लगी आर्द्रभूमियों (दलदलों) में पाई जाती है।
- वितरण: यह मुख्य रूप से भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में पाई जाती है, और इसकी कुछ आबादी नेपाल तथा म्यांमार तक भी फैली हुई है।
- भारत में, इंडियन स्किमर को देखने के लिए सबसे प्रमुख जगहों में से एक चंबल नदी है।
- संरक्षण स्थिति: IUCN: संकटग्रस्त (Endangered)
