
सन्दर्भ-फ्रांसीसी निर्मित राफेल लड़ाकू जेट के समुद्री संस्करण का गोवा में एक तट-आधारित सुगमता में सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया है,जहां स्वदेश में विकसित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत जैसी स्थितियों का अनुकरण किया गया था।
प्रमुख तथ्य-:राफेल-एम को यूएस-निर्मित सुपर हॉर्नेट के खिलाफ सक्रीय किया गया है -दोनों का मूल्यांकन भारतीय नौसेना द्वारा 44,000 टन के आईएनएस विक्रांत पर तैनाती के लिए संभावित खरीद के लिए किया जा रहा है,जिसका अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में परीक्षण चल रहा है और जिसका अगस्त में चालू होने की संभावना है।
:भारत के कैरियर के डेक से राफेल-मरीन टेक-ऑफ (क्षमता) की जांच के लिए परीक्षण किए गए और इसने बहुत अच्छा प्रदर्शन भी किया है।
:भारत के नए विमानवाहक पोत को स्की-जंप लॉन्च जहाज के रूप में डिजाइन किया गया है,ऐसे कई अन्य वाहकों से अलग है,जो अपने जेट विमानों के लिए गुलेल प्रक्षेपण का उपयोग करते हैं।
:परिणामस्वरूप भारतीय नौसेना द्वारा चयनित विमान सभी हथियार प्रणालियों और पूर्ण ईंधन भार को ले जाने के लिए इस तरह से उड़ान भरने में सक्षम होना चाहिए।
:राफेल-एम जेट का पिछले महीने गोवा के आईएनएस हंसा सुगमता में 283 मीटर मॉक स्की-जंप सुविधा का उपयोग करके 12 दिनों के लिए परीक्षण किया गया था।
:स्की-जंप रैंप उपयोग करता है जिसे नौसेना के विशेषज्ञ शॉर्ट टेक-ऑफ बट (लेकिन) अरेस्ट रिकवरी (STOBAR) तकनीक कहते हैं।
:बोइंग के सुपर हॉर्नेट या एफ/ए-18 जेट,जिसे भारत को भी पेश किया जा रहा है, इसके अगले महीने आईएनएस हंसा में इसी तरह के परीक्षणों से गुजरने की उम्मीद है।