सन्दर्भ:
: जलवायु के अनुसार ढलने को वैश्विक प्राथमिकता बनने से बहुत पहले ही, महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में रहने वाले महादेव कोली जनजाति के लोग मौसम में होने वाले बदलावों पर नज़र रखते थे, स्थानीय औषधीय पेड़ों का इस्तेमाल करते थे और ऐसे सिद्धांतों का पालन करते थे जिनसे जंगल और समुदाय स्वस्थ रहते थे।
महादेव कोली जनजाति के बारे में:
- महादेव कोली या महादेओ कोली, भारत के महाराष्ट्र और गोवा राज्यों में रहने वाले कोली समुदाय की एक उप-जाति हैं।
- इनका नाम इनके देवता ‘महादेव’ के नाम पर पड़ा है और ये महाराष्ट्र की महादेव पहाड़ियों में, मुख्य रूप से पुणे, अहमदनगर और नासिक ज़िलों में रहते हैं।
- इन्हें ‘अनुसूचित जनजाति’ (Schedule Tribe) के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।
- ये मराठी भाषा बोलते हैं और देवनागरी लिपि का इस्तेमाल करते हैं।
- महादेव कोली समुदाय में चौबीस ऐसे कुल (clans) हैं जिनमें अपने ही कुल में शादी नहीं की जाती (exogamous clans); ये अपने कुल के नाम को ही अपने उपनाम (surname) के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
- पहनावे और रूप-रंग के मामले में ये कुनबी और मराठा समुदायों जैसे ही होते हैं। ये एकल परिवारों (nuclear families) में रहते हैं।
- व्यवसाय:
- पारंपरिक रूप से शिकारी-संग्राहक और योद्धा रहे इस समुदाय के लोग आज मुख्य रूप से खेती-बाड़ी करते हैं।
- परिवार चावल, रागी (फिंगर मिलेट), बार्नयार्ड मिलेट और गेहूँ की खेती करते हैं, साथ ही पशुपालन और डेयरी उत्पादों का उत्पादन भी करते हैं।
- मान्यताएँ:
- इनका मुख्य धर्म ‘लोक हिंदू धर्म’ (Folk Hinduism) है।
- हर कुल के सदस्यों के अपने-अपने देवता होते हैं।
- इन्हें स्थानीय पेड़-पौधों और वनस्पतियों की अच्छी जानकारी होती है।
- छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना के सम्मानित सेनापति तानाजी मालुसरे इसी समुदाय से थे। सिंहगढ़ की लड़ाई में उनकी वीरता की कहानी बहुत मशहूर है।
