Mon. Jun 1st, 2026
निर्भय रहो पहलनिर्भय रहो पहल
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संदर्भ:

: पंचायती राज मंत्रालय ने नई दिल्ली में तीन दिवसीय राष्ट्रीय ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम (निर्भय रहो पहल) सफलतापूर्वक आयोजित किया।

निर्भय रहो पहल के बारें में:

  • निर्भय रहो पहल एक राष्ट्रीय, लिंग-संवेदनशील शासन और ज़मीनी स्तर पर क्षमता-निर्माण का कार्यक्रम है। इसे केंद्र सरकार के ‘निर्भया फंड’ (जो कभी खत्म नहीं होता) के ज़रिए आर्थिक मदद दी जाती है और लागू किया जाता है; इसका मकसद स्थानीय स्व-सरकारों को महिलाओं के लिए सुरक्षा के मज़बूत स्तंभों में बदलना है।
  • नोडल मंत्रालय: पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार।
  • इसका उद्देश्य:
    • इस पहल का मुख्य उद्देश्य समावेशी, संवेदनशील और महिलाओं के अनुकूल पंचायतें बनाकर ज़मीनी स्तर पर लिंग-आधारित भेदभाव और हिंसा को खत्म करना है।
    • इसका मकसद ग्रामीण इलाकों के स्थानीय नेताओं को गहरी कानूनी जानकारी, पीड़ितों पर केंद्रित सोच और सबसे पहले मदद पहुँचाने की क्षमताओं से लैस करना है, ताकि पूरे ग्रामीण भारत में सुरक्षा और न्याय तक पहुँच सुनिश्चित की जा सके।
  • मुख्य विशेषताएँ:
    • यह पहल एक व्यापक, तीन-सूत्रीय ढाँचे पर आधारित है, जिसे बुनियादी ढाँचे, नेतृत्व और सांस्कृतिक सोच से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए तैयार किया गया है:
    • निर्भय नेत्री (महिला नेतृत्व को सशक्त बनाना): इसका पूरा ध्यान 14.5 लाख चुनी हुई महिला प्रतिनिधियों (EWRs) को गहन प्रशिक्षण, क्षमता-निर्माण और कानूनी जागरूकता देने पर है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ स्थानीय सुरक्षा चुनौतियों से निपट सकें।
    • निर्भय चेतना (पुरुष साथियों को संवेदनशील बनाना): इसका उद्देश्य पूरे भारत में 17.5 लाख चुने हुए पुरुष प्रतिनिधियों को संवेदनशील बनाना, पितृसत्तात्मक पूर्वाग्रहों को तोड़ना और पुरुष नेताओं को स्थानीय स्तर पर लिंग-समानता और सुरक्षा अभियानों में शामिल करना है।
    • निर्भय दृष्टि (निगरानी का बुनियादी ढाँचा): यह तकनीक-आधारित सुरक्षा बुनियादी ढाँचे को मज़बूत बनाता है, जिसके तहत ग्राम पंचायतों के भीतर रणनीतिक ग्रामीण स्थानों पर CCTV सुरक्षा कैमरे लगाने के लिए आर्थिक मदद दी जाती है।
    • बड़े पैमाने पर कार्रवाई: इसका लक्ष्य 32 लाख से ज़्यादा चुने हुए पंचायत प्रतिनिधियों तक पहुँचना है, जिससे यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए ग्रामीण इलाकों में चलाई जाने वाली सबसे बड़ी पहलों में से एक बन जाती है।
    • व्यापक पाठ्यक्रम-आधारित प्रशिक्षण: इसमें घरेलू हिंसा, बाल विवाह, साइबर सुरक्षा, पीड़ितों को मुआवज़ा और स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज करने के नेटवर्क से जुड़ी मुख्य कानूनी जानकारियों को शामिल किया गया है।
    • विस्तार का सोपान-क्रम मॉडल: इसमें ‘प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण’ (ToT) नामक एक गतिशील तरीका अपनाया जाता है, जिसमें मुख्य प्रशिक्षक (Master Trainers) अभ्यास-आधारित सिमुलेशन, नकली अदालतों (Moot Courts) और भूमिका-निर्वाह (Role-plays) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर तक जानकारी पहुँचाते हैं।

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By gkvidya

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