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गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआगंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ
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सन्दर्भ:

: हाल ही में, भारत का पहला सैटेलाइट-टैग वाला गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ असम में 1,302 वर्ग किलोमीटर में फैले काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिज़र्व में छोड़ा गया।

गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ के बारें में:

  • यह दुनिया में ताज़े पानी के कछुओं की सबसे बड़ी प्रजातियों में से एक है।
  • इसे इंडियन सॉफ्टशेल कछुआ (Nilssonia gangetica) भी कहा जाता है।
  • दिखावट:
    • इसकी गर्दन लंबी होती है और नली जैसी थूथन इसे पानी से बाहर नाक निकालकर सांस लेने में मदद करती है।
  • आवास: ये कछुए गहरी नदियों, नालों, नहरों, झीलों और तालाबों में रहते हैं; आमतौर पर ये ऐसी जगहों को पसंद करते हैं जहाँ ज़मीन रेतीली या कीचड़ वाली हो।
  • ये गंदे पानी में भी अच्छी तरह रह लेते हैं और अपना ज़्यादातर समय रेत के नीचे छिपे हुए बिताते हैं।
  • भौगोलिक वितरण: ये अफगानिस्तान, भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में पाए जाते हैं।
    • मुख्य रूप से ये सिंधु, गंगा, मेघना, ब्रह्मपुत्र, यमुना, नर्मदा और महानदी नदी घाटियों में पाए जाते हैं।
  • आहार: इंडियन सॉफ्टशेल कछुए सर्वाहारी होते हैं; ये मछलियाँ, उभयचर, मोलस्क, कीड़े-मकोड़े, सड़े-गले जीव और पानी के पौधे खाते हैं।
  • ये कछुए फरवरी से अप्रैल के बीच प्रजनन करते हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व: इन्हें अक्सर ओडिशा के मंदिरों के तालाबों में रखा जाता है, जहाँ इन्हें पवित्र माना जाता है।
  • खतरा: आवास में बदलाव और उसका विनाश, पारंपरिक दवाओं के लिए इनका शिकार और अवैध व्यापार, खेती का विस्तार, और व्यावसायिक शोषण।
  • संरक्षण की स्थिति
    • IUCN रेड लिस्ट: लुप्तप्राय (Endangered)
    • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची I.

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By gkvidya

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