सन्दर्भ:
: शोधकर्ताओं ने एक प्रारंभिक जाँच में नागालैंड की कोन्याक जनजाति द्वारा उपयोग किए जाने वाले एक पारंपरिक हर्बल नुस्खे की पहचान की है, जिसमें कैंसर-रोधी क्षमता पाई गई है; यह खोज स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों के संबंध में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।
कोन्याक जनजाति के बारे में:
- कोन्याक लोग नागालैंड के मोन ज़िले में, और साथ ही अरुणाचल प्रदेश के तिरप और चांगलांग ज़िलों में पाए जाते हैं।
- मूल: कोन्याक लोग मंगोलॉयड मूल के हैं और अब इनकी लगभग 95% आबादी ईसाई धर्म को मानती है।
- टैटू: पारंपरिक रूप से, चेहरे और शरीर पर बने टैटू सामाजिक दर्जे और जीवन की उपलब्धियों से गहरे तौर पर जुड़े होते थे।
- भाषा: ये लोग कोन्याक भाषा बोलते हैं, जो साइनो-तिब्बती भाषा परिवार की ‘साल’ उप-शाखा की ‘उत्तरी नागा’ उप-शाखा से संबंधित है।
- समाज
- कोन्याक समाज एक पितृसत्तात्मक समाज है और परिवार के सबसे बड़े बेटे को ही आमतौर पर पिता की संपत्ति विरासत में मिलती है।
- त्योहार: कोन्याक लोगों के जीवन में त्योहारों का एक महत्वपूर्ण स्थान है। इनके तीन सबसे खास त्योहार हैं – आओलिंगमोन्यू, आओनीमो और लाओन-ओंगमो।
- अर्थव्यवस्था: ये लोग आग्नेयास्त्र (बंदूकें) बनाने की कला में माहिर होते हैं। इसके अलावा, ये टोकरी बनाने, बेंत और बांस का काम, पीतल का काम आदि जैसी हस्तकलाओं में भी कुशल होते हैं।
