यूनेस्को विरासत सूची में शामिल हुआ बिहार का Astronomical observatory

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यूनेस्को विरासत सूची में शामिल हुआ बिहार का Astronomical observatory
यूनेस्को विरासत सूची में शामिल हुआ बिहार का Astronomical observatory

सन्दर्भ:

: बिहार के मुजफ्फरपुर में लंगट सिंह कॉलेज में 106 साल पुरानी Astronomical observatory (खगोलीय वेधशाला) को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने  दुनिया की महत्वपूर्ण लुप्तप्राय विरासत वेधशालाओं की सूची में शामिल किया गया है जो पूर्वी भारत में अपनी तरह की पहली है।
:इससे पहले नेशनल कमीशन फॉर हिस्ट्री ऑफ साइंस के सदस्य और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व आधुनिक इतिहास के प्रोफेसर जेएन सिन्हा थे।

Astronomical observatory के बारे में:

: वेधशाला 1916 में 123 साल पुराने लंगट सिंह कॉलेज में बनाई गई थी जो अब भीम राव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय से संबद्ध है।
: भारत में, 1946 में कॉलेज में अपनी तरह का पहला तारामंडल भी स्थापित किया गया था,जो शायद भारत में पहला था।
:इस Astronomical observatory की स्थापना की पहल कॉलेज के रोमेश चंद्र सेन ने की थी।
:वेधशाला और तारामंडल ने 1970 के दशक की शुरुआत तक कार्य किया और वर्षों से धीरे-धीरे घटने लगा।
:फिलहाल दोनों पूरी तरह से खराब हैं।
:अभी Astronomical observatory ने प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय, कोलकाता के खगोलीय वेधशाला के साथ बातचीत की।

लंगट सिंह कॉलेज के बारें में:

:कॉलेज की स्थापना 1899 में हुई थी बाबू लंगट सिंह ने इसकी स्थापना में सबसे प्रमुख भूमिका निभाई थी।
:1900 में, कॉलेज कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध था।
:इसे 1915 में एक सरकारी कॉलेज घोषित किया गया और बाद में 1917 में पटना विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया
:1952 में, बिहार विश्वविद्यालय को पटना विश्वविद्यालय से अलग कर दिया गया और एल.एस. कॉलेज इससे संबद्ध हो गया।
:इसके बाद, 1960 में, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय की स्थापना मुजफ्फरपुर में मुख्यालय के साथ की गई थी और तब कॉलेज को इससे संबद्ध किया गया था।
:1979 में बिहार विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभाग इस संस्थान से अलग हो गए।
:1984 में विभिन्न स्ट्रीम के स्नातकोत्तर अध्ययन बहाल किए गए।
:इस कॉलेज में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और राजनेता जेबी कृपलानी ने संकाय सदस्य (Faculty Member) के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं।


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