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भारत रत्न कर्पूरी ठाकुरभारत रत्न कर्पूरी ठाकुर
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सन्दर्भ:

: प्रमुख गांधीवादी समाजवादी नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा।

कर्पूरी ठाकुर के बारें में:

: कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी 1924 काल में समस्तीपुर जिले के पितौंझिया गाँव, जिसे अब ‘कर्पूरीग्राम’ कहा जाता है में एक साधारण नाई परिवार में हुआ।
: उनके पिताजी का नाम श्री गोकुल ठाकुर तथा माता जी का नाम श्रीमती रामदुलारी देवी था।
: उन्होंने 1940 में मैट्रिक की परीक्षा पटना विश्‍वविद्यालय से द्वितीय श्रेणी में पास की।
: ‘जननायक’ के नाम से मशहूर कर्पूरी ठाकुर दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे
: कर्पूरी ठाकुर 1952 में पहली बार चुनाव मैदान में उतरे चवन्नी-अठन्नी चंदा लेकर चुनाव लड़ा था जिसमे अधिकतम चंदा 2 रुपया था।
: 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन छिड़ गया तो उससे जुड़े परिणामस्वरूप 26 महीने तक भागलपुर के कैंप जेल में जेल-यातना भुगतने के उपरांत 1945 में रिहा हुए।
: वर्ष 1948 में आचार्य नरेन्द्रदेव एवं जयप्रकाश नारायण के समाजवादी दल में प्रादेशिक मंत्री बने।
: सन् 1967 के आम चुनाव में कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में संयुक्त समाजवादी दल (संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी) बड़ी ताकत के रूप में उभरी।
: वर्ष1970 में उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया।
: वर्ष 1973-77 में वे लोकनायक जयप्रकाश के छात्र-आंदोलन से जुड़ गए।
: वर्ष 1977 में समस्तीपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से सांसद बने।
: पुनः 24 जून,1977 को बिहार के मुख्यमंत्री बने।
: सादा जीवन, सरल स्वभाव, स्पष्‍ट विचार और अदम्य इक्षाशक्ति वाले कर्पूरी ठाकुर सदैव दलित, शोषित और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए प्रयत्‍नशील रहे और संघर्ष करते रहे।
: इसका प्रमाण भी उन्होंने ने मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने पिछड़ों को 1978 में मुंगेरी लाल आयोग के तहत् 12% आरक्षण दिया, जिसमें 79 जातियां शामिल थी।
: कर्पूरी ठाकुर का 64 साल की उम्र में 17 फरवरी, 1988 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

भारत रत्न के बारे में:

: यह देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है जिसकी स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी।
: इसकी पात्रता-
1- जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना कोई भी व्यक्ति इन पुरस्कारों के लिए पात्र है।
2- हालांकि आमतौर पर भारत में जन्मे नागरिकों को भारत रत्न प्रदान किया जाता है, लेकिन भारत रत्न एक प्राकृतिक नागरिक, मदर टेरेसा और दो गैर-भारतीयों, पाकिस्तानी नागरिक खान अब्दुल गफ्फार खान और दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला को प्रदान किया गया है।
3- मूल क़ानून में मरणोपरांत पुरस्कारों का प्रावधान नहीं था लेकिन उन्हें अनुमति देने के लिए 1955 में संशोधन किया गया था, पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री मरणोपरांत सम्मानित होने वाले पहले व्यक्ति बने।
: यह मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र में उच्चतम स्तर की असाधारण सेवा/प्रदर्शन की मान्यता के लिए प्रदान किया जाता है।
: भारत रत्न के लिए सिफारिशें स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति को की जाती हैं और इसके लिए किसी औपचारिक सिफारिश की आवश्यकता नहीं होती है।
: किसी विशेष वर्ष में वार्षिक पुरस्कारों की संख्या अधिकतम तीन तक सीमित है।
: पुरस्कार प्रदान किए जाने पर, प्राप्तकर्ता को राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक सनद (प्रमाण पत्र) और एक पदक प्राप्त होता है, पुरस्कार में कोई मौद्रिक अनुदान नहीं दिया जाता है।


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By gkvidya

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