बिहार सरकार ने दूसरा टाइगर रिज़र्व विकसित किया

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बिहार सरकार ने दूसरा टाइगर रिज़र्व विकसित किया

सन्दर्भ:हाल ही में बिहार सरकार ने “कैमूर वन्यजीव अभ्यारण्य” को टाइगर रिज़र्व के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।
:इससे सम्बंधित प्रस्ताव को हाल ही में संपन्न 19वीं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण(NTCA) की बैठक में पारित किया गया।
प्रमुख तथ्य-:बिहार में वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के बाद यह दूसरा टाइगर रिज़र्व होगा।
:इसके निर्माण के लिए कोर एरिया,बफर एरिया व कॉरिडोर को चिन्हित किया जा रहा है।
:कैमूर टाइगर रिज़र्व के विकास के बाद बिहार के पुरे शाहाबाद क्षेत्र में पर्यटन की सम्भावना में वृद्धि होगी।
:कैमूर वन्यजीव अभ्यारण्य- यह अभ्यारण्य बिहार के कैमूर जिलें के भभुआ शहर के पास स्थित है।
:इसका कुल क्षेत्रफल 1342 वर्ग किलोमीटर है।
:इस अभ्यारण्य में पाए जाने वाले प्रमुख जानवर है-बंगाल टाइगर,भारतीय तेंदुए,सांभर हिरण,चीतल,चार सिंग वाले मृग,नीलगाय और जंगली सूअर इत्यादि।
:साथ ही इसमें वर्ष भर निवास करने वाली 70 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां है।
:70 के दशक में यहाँ बहुत अधिक संख्या में बाघ पाये जाते थे।
:देश में 51 टाइगर रिज़र्व है और अधिक से अधिक क्षेत्रों को टाइगर रिज़र्व नेटवर्क के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
:भारत सरकार ने बाघों के संरक्षण के लिए वर्ष 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरू किया।
:राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण(NTCA)-इसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है।


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