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डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को भारत रत्नडॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को भारत रत्न
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सन्दर्भ:

: भारत के विख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को प्रधानमंत्री ने भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की है।

डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के बारें में:

: इन्हे हरित क्रांति के जनक कहा जाता है।
: कृषि उत्पादन में देश में धान की फसल को बढ़ावा देने हेतु अहम भूमिका निभाई थी, साथ ही उन्होंने धान की अत्यधिक उपज देने वाली किस्मों को विकसित करने में बहुत बड़ा योगदान दिया था।
: उन्हीं की देन है कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को अत्यधिक अन्न उत्पादन में काफी सहायता मिली थी।
: उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए 1987 में पहला विश्व खाद्य पुरस्कार भी दिया गया था।
: इसके अतिरिक्त उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण,  शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और अल्बर्ट आइंस्टीन विश्व विज्ञान पुरस्कार से भी सम्मानित किया चूका है।
: ज्ञात हो कि एम.एस. स्वामीनाथन ने भारत को गेहूं और धान के अलावा आलू की पैदावार बढ़ाने में भी उनके अमूल्य योगदान हेतु जाना जाता है।
: उन्होंने अपना जीवन खेती में नए प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान को अपनाकर कृषि अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने हेतु समर्पित कर दिया।
: डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन या मनकोम्बु संबाशिवन स्वामीनाथन का जन्म 07 अगस्त 1925 को मद्रास के कुंभकोणम में हुआ था।
: उनकी मुलाकात 1951 में कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान मीना से हुई थी जिनसे बाद में उन्होंने विवाह की थी।
: डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन का विगत वर्ष 28 सितम्बर 2023 को 98 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया था।
: डॉ. स्वामीनाथन ने किसानों और कृषि के विकास हेतु विभिन्न विभागों में प्रमुख जिम्मेदारियाँ संभाली थीं।
: अपने कार्यकाल के दौरान वे कई प्रमुख पदों पर भी रहे।
: वे 1961 से 1972 तक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक रहे, इसके बाद 1972 से 1979 तक आईसीआर के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और 1979 से 1980 तक कृषि मंत्रालय के प्रधान सचिव रहे।
: इसके अलावा 2004 में यूपीए सरकार ने उन्हें किसानों की स्थिति का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग (NCF) आयोग के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था।
: उन्होंने 2004 से 2006 तक आयोग को पांच रिपोर्ट सौंपी थीं जिनमें किसानों की स्थिति में सुधार के लिए प्रमुख सुझाव भी दिए गए थे।


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By gkvidya

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