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आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांकआर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक
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सन्दर्भ:

: एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक (Economic Freedom Index) पर 165 देशों में से भारत एक पायदान गिरकर 87वें स्थान पर आ गया है।

आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक में भारत से जुड़े प्रमुख तथ्य:

: पिछले साल की रैंकिंग में देश 86वें स्थान पर था।
: कनाडा के फ्रेजर इंस्टीट्यूट द्वारा ‘विश्व की आर्थिक स्वतंत्रता: 2021 वार्षिक रिपोर्ट’ नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के संयोजन में भारत में जारी की गई है।
: 1980 से अब तक भारत की रेटिंग काफी बढ़ गई है, 4.90 से 6.62 हो गई है लेकिन हमारी रैंक गिर गई है।
: इसका मतलब यह है कि भारत पूर्ण रूप से काफी सुधार कर रहा है, लेकिन अन्य देशों की तुलना में पर्याप्त सुधार नहीं कर रहा है।
: हालाँकि, रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में भारत काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
: भारत ने सरकार के आकार (7.57 से 7.64) और ऋण, श्रम और व्यापार के विनियमन (5.96 से 5.98) में मामूली वृद्धि दर्ज की।
: जबकि कानूनी प्रणाली और संपत्ति के अधिकार (5.3 से 5.29) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने की स्वतंत्रता (6.27 से 6.19) में यह थोड़ा नीचे था।
: 10 के करीब का स्कोर आर्थिक स्वतंत्रता के उच्च स्तर को इंगित करता है।
: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार की स्वतंत्रता के मामले में भारत 165 देशों में से 114वें और नियमन के मामले में 116वें स्थान पर है।
: इन क्षेत्रों में सुधारों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है।

रैंकिंग में अन्य देश की स्थिति:

: रिपोर्ट के मुताबिक, इस सूचकांक में सिंगापुर शीर्ष पर है।
: इसके बाद हांगकांग, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, अमेरिका, आयरलैंड, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, यूके और कनाडा का स्थान रहा।
: भारत को चीन से ऊपर स्थान दिया गया है, जो 111वें स्थान पर है। वेनेजुएला एक बार फिर आखिरी स्थान पर है।
: अन्य उल्लेखनीय रैंकिंग में जापान (20वीं), जर्मनी (23वीं), फ्रांस (47वीं) और रूस (104वीं) शामिल हैं।


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By gkvidya

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