सन्दर्भ:
: भारत के PM और रूस के राष्ट्रपति इंडिया-रूस समिट के दौरान मिलेंगे, जहाँ दोनों रक्षा मंत्रियों के रूस के अगली पीढ़ी के S-500 वायु रक्षा प्रणाली (S-500 Air Defence System) में भारत की संभावित दिलचस्पी पर चर्चा करने की उम्मीद है।
S-500 वायु रक्षा प्रणाली के बारे में:
- S-500 प्रोमेटी रूस का सबसे एडवांस्ड लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर और एंटी-स्पेस डिफेंस सिस्टम है, जो एयरक्राफ्ट, बैलिस्टिक मिसाइल, हाइपरसोनिक हथियार और यहां तक कि लो-ऑर्बिट सैटेलाइट को भी इंटरसेप्ट कर सकता है।
- इसे रूस की प्रीमियर एयर-डिफेंस मैन्युफैक्चरर अल्माज़-एंटे ने डेवलप किया है।
- इसकी मुख्य विशेषताएं:
- अल्ट्रा-लॉन्ग रेंज: 600 km दूर तक के टारगेट को इंटरसेप्ट कर सकता है।
- नियर-स्पेस इंटरसेप्शन: 200 km तक की ऊंचाई पर काम करता है, जिसमें लो-अर्थ-ऑर्बिट ऑब्जेक्ट भी शामिल हैं।
- हाइपरसोनिक इंटरसेप्टर: 77N6-N / 77N6-N1 जैसी मिसाइलें Mach 5–7 पर उड़ती हैं, और “हिट-टू-किल” एक्यूरेसी का इस्तेमाल करती हैं।
- मल्टी-टारगेट एंगेजमेंट: स्टेल्थ जेट, बैलिस्टिक मिसाइल, हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल और ड्रोन को ट्रैक और नष्ट करता है।
- एडवांस्ड रडार सूट: 91N6A(M) और 96L6-TsP रडार 800 km दूर तक के खतरों का पता लगा सकते हैं, जिसमें स्टेल्थ एयरक्राफ्ट भी शामिल हैं।
- रैपिड रिस्पॉन्स: 3–4 सेकंड का रिएक्शन टाइम, S-400 से लगभग दोगुना तेज़।
- हाईली मोबाइल: जल्दी डिप्लॉयमेंट के लिए ऑल-टेरेन ट्रांसपोर्टर पर लगाया जाता है।
- इसका महत्व:
- भारत के लेयर्ड एयर-डिफेंस शील्ड में बड़ा स्ट्रेटेजिक अपग्रेड।
- चीन की हाइपरसोनिक मिसाइलों और पाकिस्तान के बैलिस्टिक हथियारों के खिलाफ भारत की क्षमता को बढ़ाता है।
- भारत को एंटी-स्पेस डिफेंस देता है जो दुनिया भर में एक दुर्लभ क्षमता है।
