सन्दर्भ:
: हाल ही में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने कहा कि GARBH-INi पहल के तहत 12,000 महिलाओं पर किया जा रहा भारत का सबसे बड़ा गर्भावस्था कोहोर्ट अध्ययन, समय से पहले जन्म की समस्या से निपटने के लिए स्वदेशी और AI-आधारित समाधान विकसित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
GARBH-INi पहल के बारें में:
- यह माँ और बच्चे के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है और समय से पहले जन्म (preterm birth) का अनुमान लगाने के लिए टूल विकसित करता है।
- यह जन्म परिणामों में उन्नत अनुसंधान के लिए एक अंतर्विषयक समूह है – DBT इंडिया पहल (GARBH-Ini); इसके तहत 2015 में गर्भवती महिलाओं का एक कोहोर्ट अध्ययन शुरू किया गया था।
- इसका उद्देश्य
- गर्भावस्था के प्रतिकूल परिणामों, जैसे कि समय से पहले जन्म (PTB) और भ्रूण के विकास में रुकावट (FGR) के बारे में गहन बुनियादी जानकारी प्राप्त करना।
- इस जानकारी का उपयोग करके ऐसे कुशल और टिकाऊ समाधानों की पहचान करना, जो इससे जुड़ी मृत्यु दर और तत्काल व दीर्घकालिक रुग्णता (बीमारी) को कम करने में मदद करें।
- यह केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक सहयोगी अंतर्विषयक कार्यक्रम के रूप में शुरू की गई एक पहल है।
- इस कार्यक्रम का नेतृत्व ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI), NCR बायोटेक क्लस्टर, फरीदाबाद द्वारा किया जा रहा है।
- यह ‘अटल जय अनुसंधान बायोटेक मिशन- राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक प्रौद्योगिकी नवाचार (UNaTI)’ का एक हिस्सा है।
प्रीटर्म बर्थ के बारें में:
- इसे उन बच्चों के जन्म के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो गर्भावस्था के 37 सप्ताह पूरे होने से पहले जीवित पैदा होते हैं। गर्भकालीन आयु के आधार पर प्रीटर्म बर्थ की उप-श्रेणियाँ होती हैं:
- अत्यधिक प्रीटर्म (28 सप्ताह से कम)
- बहुत प्रीटर्म (28 से 32 सप्ताह)
- मध्यम से देर से प्रीटर्म (32 से 37 सप्ताह)
