सन्दर्भ:
: सरकार ने संसद को FAME-II और PM E-DRIVE जैसी योजनाओं के तहत पूरे भारत में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति और विस्तार के बारे में जानकारी दी।
EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में:
- EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब चार्जिंग स्टेशनों (EVPCS) के एक नेटवर्क से है, जो इलेक्ट्रिक गाड़ियों को रिचार्ज करने के लिए बिजली सप्लाई करते हैं।
- इसमें पब्लिक, प्राइवेट और हाईवे पर बने चार्जिंग सिस्टम शामिल हैं, जिनमें सरकार और प्राइवेट, दोनों तरह के प्लेयर्स की हिस्सेदारी होती है।
- डेटा / मुख्य आँकड़े:
- कुल EV पब्लिक चार्जिंग स्टेशन (मार्च 2026 तक): 27,737 लगाए गए; 22,753 चालू हैं।
- सबसे ज़्यादा इंस्टॉलेशन यहाँ हुए: उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु।
- FAME-II स्कीम: ₹912.5 करोड़ मंज़ूर; ₹655.43 करोड़ इस्तेमाल हुए।
- PM E-DRIVE स्कीम: ₹2,000 करोड़ आवंटित (अभी तक कोई फंड जारी नहीं हुआ है)।
- EV चार्जिंग सेटअप को लाइसेंस-मुक्त कर दिया गया है, जिससे प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी मुमकिन हो गई है।
- इसका महत्व:
- इससे फॉसिल फ्यूल से क्लीन मोबिलिटी की ओर बदलाव संभव होता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन और तेल पर निर्भरता कम होती है।
- चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता से ‘रेंज एंग्ज़ायटी’ (गाड़ी की बैटरी खत्म होने का डर) कम होती है, जिससे भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का चलन तेज़ी से बढ़ता है।
- यह EV इकोसिस्टम और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, इनोवेशन और रोज़गार के अवसर पैदा करने को बढ़ावा देता है।
