सन्दर्भ:
: हाल ही में, माहे एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) भारतीय नौसेना को सौंपा गया।
ASW SWC के बारें में:
: यह आठ पनडुब्बी रोधी युद्धक उथले जल यानों (ASW SWC) में से पहला है।
: इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) कोच्चि द्वारा किया गया था।
: इसका नाम केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर के नाम पर रखा गया है, जो भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रतीक है।
: इस युद्धपोत का डिज़ाइन और निर्माण डेट नॉर्स्के वेरिटास (DNV) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार किया गया है।
: माहे की विशेषताएँ:-
- क्षमता: इसका विस्थापन लगभग 1,100 टन है।
- इसमें टॉरपीडो, बहु-कार्यात्मक पनडुब्बी रोधी रॉकेट और परिष्कृत रडार और सोनार प्रणालियाँ हैं जो इसे पानी के भीतर के खतरों का सटीकता से पता लगाने में सक्षम बनाती हैं।
- यह जहाज पानी के भीतर निगरानी भी कर सकता है, आवश्यकता पड़ने पर नौसैनिक बारूदी सुरंगें बिछा सकता है, और कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों के रूप में जाने जाने वाले छोटे पैमाने के तटीय अभियानों में भाग ले सकता है।
: इसका महत्व- इससे भारतीय नौसेना की ASW क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, तथा तटीय क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा बढ़ेगी।
