
सन्दर्भ-केन्द्रीय मत्स्यपालन,पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला ने “सौराष्ट्र मालधारी सम्मेलन” को संबोधित किया।
थीम/विषय है- “सौराष्ट्र में पशुपालन को प्रोत्साहन- संरक्षण एवं निर्वहन”
प्रमुख तथ्य-इसका आयोजन गुजरात के राजकोट जिले के उपलेटा में सहजीवन (पशुचारण केंद्र) द्वारा आयोजित किया जा रहा हैं।
:इस सम्मेलन में सहयोगी प्रयासों के लिए सभी हितधारकों की भागीदारी से लैस एक सलाहकार समिति के गठन किया जाएगा।
:जरूरत दुग्ध आधारित अर्थव्यवस्था पर ध्यान देते हुए आजीविका से संबंधी रणनीतियों को बढ़ावा देने पर चर्चा के साथ हलारी नस्ल के गधों के प्रजनकों की कार्यकाल संबंधी सुरक्षा को बेहतर बनाने पर भी चर्चा की गई।
:हलारी नस्ल का गधा अर्ध-शुष्क जलवायु वाले गुजरात के सौराष्ट्र इलाके के जामनगर और द्वारका जिले का एक महत्वपूर्ण पशुधन है,जिसका मालवाहक के रूप में उपयोग भरवाड़ और रबारी चरवाहे करते है।
:हलार क्षेत्र के इन गधों का अस्तित्व खतरे में है और इनकी संख्या में आ रही गिरावट 2015 में इनको पालने वाले 1200 व्यक्ति थे वही 2021-22 में यह घटकर 439 हो गया है।
:नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर इक्विन्स (एनआरसीई) सहित इस क्षेत्र तथा इससे जुड़े,तथा सरकार से जुड़े अधिकारी भी भाग लिए।
:सहजीवन द्वारा संकलित एक पुस्तक “पास्टोरल ब्रीड्स ऑफ इंडिया” का विमोचन किया गया।
:सौराष्ट्र एवं कच्छ के मालधारियों के एक समूह द्वारा एक “अपेक्षा पत्र” भी साझा किया गया।
:राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) को पशुधन उत्पादन से जुड़ी प्रणालियों में मात्रात्मक और गुणात्मक सुधार और सभी हितधारकों की क्षमता निर्माण के लिए डिज़ाइन किया गया है, के बारे में भी चर्चा की गई।
:पशुपालकों ने एक महत्वपूर्ण अनुपात में भारत की पशुधन की विभिन्न नस्लों – आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त 200 नस्लों में से 73 – को विकसित किया है।