
सन्दर्भ-केंद्रीय सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री श्री नारायण राणे ने आज “एमएसएमई आइडिया हैकथॉन 2022” के साथ एमएसएमई इनोवेटिव स्कीम (इनक्यूबेशन,डिजाइन और आईपीआर) का शुभारंभ किया।
प्रमुख तथ्य-इन योजनाओं से उद्यमियों को नए उद्यम विकसित करने में मदद मिलेगी,साथ ही रचनात्मकता को बढ़ावा मिलेगा।
:इनोवेशन से जुड़ी गतिविधियों के लिए एक हब के रूप में कार्य करेगा।
:एमएसएमई इनोवेटिव एक उद्देश्य के साथ 3 सब-कंपोनेंट और कार्यों को एकीकृत करने,तालमेल बिठाने और कन्वर्ज करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण है।
:यह योजना एमएसएमई के लिए एक नई अवधारणा है जहां इन्क्यूबेशन में इनोवेशन,डिजाइन इंटरवेंशन और सिंगल मोड एप्रोच में इंटलैक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) की रक्षा के लिए काम किया जाएगा।
:यह भारत के इनोवेशन के बारे में एमएसएमई के बीच जागरूकता पैदा करने और उन्हें MSME चैंपियन बनने के लिए प्रेरित करने पर भी इसका जोर देगा।
:यह इनोवेशन से जुड़ी गतिविधियों के लिए एक हब के रूप में कार्य करेगा।
इस योजना के तहत निम्न उप-योजनाए है-
इनक्यूबेशन-इसका प्राथमिक उद्देश्य अप्रयुक्त रचनात्मकता को बढ़ावा देना और उसकी सहायता करना है,साथ ही प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट स्तर पर अपने आइडिया की वैलिडेशन के लिए एमएसएमई में नवीनतम तकनीकों को अपनाने हेतु बढ़ावा देना।
:प्रति आइडिया 15 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता और संबंधित संयंत्र और मशीनों के लिए एक करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे।
डिजाइन-इस योजना का उद्देश्य भारतीय मैन्युफेक्चरिंग क्षेत्र और डिजाइन विशेषज्ञता/डिजाइन बिरादरी को एक साझा मंच पर लाना है।
:डिजाइन प्रोजेक्ट के लिए 40 लाख तक की वित्तीय सहायता और छात्र प्रोजेक्ट के लिए 2.5 लाख रुपए प्रदान किए जाएंगे।
आईपीआर (बौद्धिक संपदा अधिकार)-इस योजना का उद्देश्य एमएसएमई के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों (इंटलैक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स) के बारे में जागरूकता बढ़ाने और भारतीय अर्थव्यवस्था में रचनात्मक बौद्धिक प्रयास को प्रोत्साहित करने के लिए भारत में आईपी संस्कृति में सुधार करना है।
:साथ ही आईपी सुविधा केंद्र के माध्यम से आईपीआर उपकरणों के प्रभावी उपयोग के लिए विकसित विचारों, तकनीकी इनोवेशन और ज्ञान-संचालित व्यापार रणनीतियों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त उपाय करना है।
:इसमें विदेशी पेटेंट के लिए 5 लाख रुपए,घरेलू पेटेंट पर 1 लाख रुपए,जीआई(GI) पंजीकरण के लिए 2 लाख रुपए,डिजाइन पंजीकरण के लिए 15,000 रुपए, प्रतिपूर्ति के रूप में ट्रेडमार्क के लिए 10,000 रुपए तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है।