सन्दर्भ:
: हाल ही में, ‘स्केलिंग अर्बन क्लाइमेट रेज़िलिएंस: द CapaCITIES लिगेसी एंड वे फॉरवर्ड’ (Scaling Urban Climate Resilience: The CapaCITIES Legacy and Way Forward) नाम के एक कार्यक्रम में CapaCITIES प्रोग्राम के तहत पिछले एक दशक में हुई प्रगति का जश्न मनाया गया।
CapaCITIES प्रोग्राम के बारे में:
- इसे 2016 में शुरू किया गया था।
- भारत में कम कार्बन और जलवायु-अनुकूल शहर विकास पर क्षमता निर्माण परियोजना (CapaCITIES) प्रोग्राम, भारतीय शहरों की कम-कार्बन और जलवायु-अनुकूल शहरी विकास को बढ़ावा देने की क्षमता को मजबूत करता है।
- फंडिंग: इसे भारत और भूटान में स्विट्जरलैंड के दूतावास से फंडिंग मिलती है।
- कार्यान्वयन: यह पहल ICLEI साउथ एशिया, साउथ पोल और econcept की मिली-जुली साझेदारी से लागू की गई थी।
- नॉलेज पार्टनर: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स
- चरण: पहला चरण (2016-19) और दूसरा चरण (2019-23)
- मुख्य विशेषताएं:
- इसने भारतीय शहरों को शहरी प्रशासन में कम-कार्बन और जलवायु-अनुकूल विकास को मुख्यधारा में लाने के लिए जरूरी जानकारी, टूल्स और संस्थागत क्षमताएं प्रदान की हैं।
- शहरों को सहायता: इसने तमिलनाडु में कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली; अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, उदयपुर और सिलीगुड़ी जैसे शहरों और गुजरात व तमिलनाडु की राज्य सरकारों की मदद की है।
- संस्थागत प्रशासन: लंबे समय तक कार्यान्वयन, निगरानी और जलवायु बजटिंग को सक्षम करने के लिए छह प्रोजेक्ट शहरों में स्थायी नेट-ज़ीरो और क्लाइमेट एक्शन सेल स्थापित किए गए।
