सन्दर्भ:
: हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर के अंदर स्थित अमृत कुंड से एक अनोखा शिवलिंग मिला है, जो सदियों से छिपा हुआ था।
त्र्यंबकेश्वर मंदिर के बारे में:
- यह भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और ऐतिहासिक हिंदू मंदिर है।
- यह महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबक गांव में स्थित है।
- यह ब्रह्मगिरि नामक पर्वत के पास स्थित है, जहाँ से गोदावरी नदी बहती है।
- यह भारत के बारह प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
- त्र्यंबकेश्वर मंदिर का आध्यात्मिक इतिहास कई शताब्दियों पुराना है और इसका उल्लेख शिव पुराण, स्कंद पुराण और पद्म पुराण जैसे पवित्र ग्रंथों में किया गया है।
- वर्तमान मंदिर संरचना का निर्माण तीसरे पेशवा, बालाजी बाजीराव (1740-1760) द्वारा एक पुराने मंदिर के स्थान पर किया गया था।
- वास्तुकला:
- मंदिर का निर्माण हेमाडपंथी शैली में किया गया है, जो एक पारंपरिक वास्तुशिल्प रूप है जो अपनी ताकत, समरूपता और मोर्टार के न्यूनतम उपयोग के लिए जाना जाता है।
- इसका निर्माण पूर्णतः काले बेसाल्ट पत्थर से किया गया है।
- इसकी दीवारों और टावर (शिखर) पर कई छोटी-छोटी नक्काशी की गई है।
- उसका आँगन चौड़ा है, और बाहरी दीवारों पर छोटे-छोटे मंदिर हैं।
- गर्भगृह में तीन मुख वाला ज्योतिर्लिंग है, जो चमकदार रत्नजड़ित मुकुट से सुशोभित है, माना जाता है कि यह पांडव काल का है।
- मंदिर परिसर के भीतर कुशावर्त कुंड स्थित है, एक पवित्र तालाब जिसे गोदावरी नदी का उद्गम स्थल माना जाता है।
