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विक्रम-1विक्रम-1
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सन्दर्भ:

: हैदराबाद की स्पेस-टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने घोषणा की है कि विक्रम-1( Vikram-1) की पहली टेस्ट फ़्लाइट, जिसे ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया है, के लिए लॉन्च विंडो तय हो गई है।

विक्रम-1 के बारें में:

  • विक्रम-1 सात मंज़िला ऊँचाई वाला, मल्टी-स्टेज ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है, जिसे छोटे सैटेलाइट्स को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखे गए इस रॉकेट का विकास सब-ऑर्बिटल टेस्ट उड़ानों से लेकर बड़े पैमाने पर कमर्शियल ऑर्बिटल ऑपरेशन्स की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
  • इसे किसने बनाया: इस रॉकेट को पूरी तरह से स्काईरूट एयरोस्पेस ने इन-हाउस डिज़ाइन, विकसित और निर्मित किया है। स्काईरूट हैदराबाद स्थित एक प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप है, जिसकी स्थापना इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों ने की थी।
  • स्काईरूट ने हाल ही में 1.1 बिलियन डॉलर से ज़्यादा के वैल्यूएशन के साथ यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया है।
  • मिशन आगमन का उद्देश्य:
    • मिशन: ‘आगमन’ (एक संस्कृत शब्द जिसका अर्थ है “आना”) नाम का यह मिशन ग्लोबल ऑर्बिटल लॉन्च स्टेज पर भारत के प्राइवेट सेक्टर के आगमन का प्रतीक है।
    • टारगेट ऑर्बिट: इस उड़ान का मकसद 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 60-डिग्री झुकाव (इन्क्लिनेशन) के साथ 450 किलोमीटर की लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में पहुंचाना है।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • ऑल-कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर: पूरा रॉकेट एडवांस्ड हल्के कार्बन कम्पोजिट मटीरियल से बना है। इससे यह पक्का होता है कि लॉन्च के समय लगने वाले ज़बरदस्त दबाव को झेलने के लिए रॉकेट का स्ट्रक्चर मज़बूत रहे और साथ ही पेलोड क्षमता को बढ़ाने के लिए उसका वज़न भी कम रहे।
    • इन-हाउस सॉलिड और लिक्विड प्रोपल्शन: विक्रम-1 में स्काईरूट द्वारा पूरी तरह से विकसित सॉलिड और लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इसके पहले तीन स्टेज में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर रखे गए शक्तिशाली सॉलिड रॉकेट मोटर्स का इस्तेमाल होता है।
    • 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन: इस रॉकेट में अत्याधुनिक 3D-प्रिंटेड इंजन पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पारंपरिक मशीनिंग की तुलना में तेज़ी से मैन्युफैक्चरिंग, कम प्रोडक्शन कॉस्ट और डिज़ाइन में ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।
    • हाई लॉन्च कैडेंस डिज़ाइन: इस रॉकेट को खास तौर पर तेज़ी से असेंबल करने और बार-बार लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि ग्लोबल स्मॉल सैटेलाइट ऑपरेटर्स की तेज़ी से बढ़ती ज़रूरतों को पूरा किया जा सके।
    • विक्रम-S से विकास: विक्रम-1 उसी बुनियादी टेक्नोलॉजी पर आधारित है जिसे नवंबर 2022 में छोटे विक्रम-S रॉकेट (मिशन प्रारंभ) के सफल सब-ऑर्बिटल लॉन्च के ज़रिए साबित किया गया था।
  • महत्व:
    • विक्रम-1 का सफल लॉन्च यह साबित करेगा कि भारतीय प्राइवेट कंपनियाँ स्वतंत्र रूप से ऑर्बिटल रॉकेट बना और लॉन्च कर सकती हैं, जिससे भारत के स्पेस सेक्टर में सुधारों को बढ़ावा मिलेगा।
    • विक्रम-1 कमर्शियल सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन के लिए भरोसेमंद और किफायती लॉन्च सर्विस देकर ग्लोबल स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में भारत की स्थिति को मज़बूत करता है।

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By gkvidya

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