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भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कारभारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार
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संदर्भ:

: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने नई दिल्ली में मारुति सुजुकी द्वारा विकसित भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार लॉन्च की।

भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार के बारे में:

  • फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) एक एडवांस्ड ट्रांसपोर्ट सॉल्यूशन है जिसमें इंटरनल कंबशन इंजन लगा होता है, इसे कई तरह के फ्यूल कॉम्बिनेशन पर आसानी से चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • पारंपरिक पेट्रोल इंजन के विपरीत, जो केवल मामूली बदलावों को ही झेल पाते हैं, ये गाड़ियां पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग मिश्रणों के हिसाब से खुद को ढाल सकती हैं। ये मिश्रण E20 (20% इथेनॉल, 80% पेट्रोल) से लेकर E100 (100% शुद्ध इथेनॉल) तक हो सकते हैं।
  • फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ी कैसे काम करती है?
    • फ्लूइड इनटेक: ड्राइवर किसी भी मंज़ूरी प्राप्त फ्यूल मिश्रण (जैसे स्टैंडर्ड E20 से लेकर हाई-कंसंट्रेशन E100 तक) को एक ही फ्यूल टैंक में भरता है।
    • रियल-टाइम फ्यूल सेंसिंग: फ्यूल लाइन में लगा एक खास फ्यूल कंपोज़िशन सेंसर लगातार बहने वाले लिक्विड का विश्लेषण करता है और तुरंत अल्कोहल-से-गैसोलीन के सटीक अनुपात का पता लगाता है।
    • डायनामिक ECU अडैप्टेशन: सेंसर इस कंपोज़िशन डेटा को गाड़ी के इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) को भेजता है। चूंकि इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी स्टैंडर्ड पेट्रोल से कम होती है लेकिन ऑक्टेन रेटिंग ज़्यादा होती है, इसलिए ECU अपने आप इंजन की सेटिंग्स को एडजस्ट कर लेता है।
    • कंबशन ऑप्टिमाइज़ेशन: ECU तुरंत फ्यूल इंजेक्टर की टाइमिंग और मात्रा को एडजस्ट करता है और स्पार्क प्लग इग्निशन को आगे या पीछे करता है। यह लगातार मॉनिटरिंग यह पक्का करती है कि चाहे कोई भी इथेनॉल मिश्रण इस्तेमाल किया जाए, कंबशन सुचारू और हाई-एफिशिएंसी वाला हो, और इंजन की पावर में कोई कमी न आए या नॉकिंग न हो।
  • इकोसिस्टम और गाड़ी की मुख्य विशेषताएं:
    • विस्तृत मिश्रण अनुकूलता: इसे E20 से लेकर E100 तक किसी भी पेट्रोल-इथेनॉल मिश्रण पर भरोसेमंद तरीके से चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे स्थानीय उपलब्धता के आधार पर फ्यूल भरने के लचीले विकल्प मिलते हैं।
    • मोनो-फ्यूल स्टैंडर्डाइज़ेशन: नीति आयोग और ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने सर्टिफाइड फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए E85 को आधिकारिक तौर पर मोनो-फ्यूल स्टैंडर्ड स्पेसिफिकेशन के रूप में पहचाना है।
    • ज़ीरो-एमिशन क्लासिफिकेशन: नीति आयोग इथेनॉल-आधारित FFV (जिनमें हाई-ब्लेंड E85 पर चलने वाली गाड़ियां भी शामिल हैं) को उनके न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव के कारण आधिकारिक तौर पर ज़ीरो-एमिशन गाड़ियां मानता है।
    • चरणबद्ध तरीके से इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: सरकार के रोडमैप के तहत दिल्ली-NCR और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में शुरुआती तौर पर 50-100 FFV-रेडी रिटेल स्टेशन शुरू करने की योजना है। यह नेटवर्क दिसंबर 2026 तक लगभग 500 आउटलेट और 2027 के आखिर तक बड़े शहरों में करीब 5,000 आउटलेट तक फैल जाएगा।
    • व्यापक वित्तीय और नीतिगत प्रोत्साहन: राज्यों के सहयोग वाले फ्रेमवर्क का समर्थन, जिसमें कीमतों में मदद, रोड टैक्स में छूट, E85 टेस्टिंग फ्यूल की उपलब्धता और नियमों का पालन करने वाले वाहनों व पंपों के लिए खास पहचान चिह्न शामिल हैं।
    • विविध घरेलू फीडस्टॉक स्रोत: पूरी तरह से भारत में तैयार इथेनॉल का इस्तेमाल, जो टूटे हुए अनाज, खेती के कचरे, बांस और समुद्री शैवाल जैसे कई तरह के कच्चे माल से बनता है।

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By gkvidya

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