सन्दर्भ:
: भारत के प्रधानमंत्री गुजरात स्थित प्रतिष्ठित सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) का दौरा करने वाले हैं, यह दौरा, 1951 में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा इस पुनर्निर्मित हिंदू मंदिर के उद्घाटन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया जा रहा है।
सोमनाथ मंदिर के बारे में:
- यह भगवान शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर है।
- यह गुजरात के पश्चिमी तट पर सौराष्ट्र में वेरावल के पास प्रभास पाटन में स्थित है।
- यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से पहला है, जिन्हें स्वयं भगवान शिव का ही स्वरूप माना जाता है।
- सोमनाथ का स्थान प्राचीन काल से ही एक तीर्थ स्थल रहा है, क्योंकि यहाँ त्रिवेणी संगम है– यानी तीन नदियों: कपिला, हिरण और सरस्वती का मिलन स्थल।
- इस प्राचीन मंदिर का इतिहास 649 ईसा पूर्व से मिलता है, लेकिन माना जाता है कि यह उससे भी पुराना है।
- इस मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए; इनमें सबसे उल्लेखनीय आक्रमण 11वीं सदी में महमूद गजनवी द्वारा किया गया था।
- पुनर्निर्माण के प्रयास: इस मंदिर का कई बार पुनर्निर्माण किया गया; यह कार्य अलग-अलग राजवंशों द्वारा किया गया, जिनमें परमार, चालुक्य और मराठा शामिल हैं।
- वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण हिंदू मंदिर वास्तुकला की चालुक्य शैली में किया गया था, और यह मई 1951 में बनकर तैयार हुआ।
- इस पुनर्निर्माण का कार्य वल्लभभाई पटेल द्वारा पूरा करवाया गया था।
- वास्तुकला:
- इस मंदिर की वास्तुकला अत्यंत भव्य और विस्तृत है, जिसमें कई समृद्ध और बारीक नक्काशी की गई है।
- यह मंदिर सात मंज़िला है और इसकी ऊँचाई लगभग 155 फीट है।
- इस मंदिर की स्थिति (लोकेशन) काफी अनोखी है।
- मंदिर को इस तरह से बनाया गया है कि सोमनाथ के समुद्र तट से लेकर अंटार्कटिका तक, बीच में ज़मीन का एक भी टुकड़ा दिखाई नहीं देता।
- मंदिर के शिखर पर एक भव्य ‘कलश’ (या पात्र) स्थापित है, जिसका वज़न लगभग 10 टन है।
- शिखर पर एक ध्वज (झंडा) लहराता है, जिसका दंड (पोल) 37 फीट लंबा है।
