सन्दर्भ:
: हाल ही में यह देखा गया कि ओडिशा के कोरापुट में आदिवासी समुदाय लगातार तीसरे वर्ष केंदू पत्ता (Kendu Leaf) पर अपने कानूनी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
केंदू पत्ता के बारें में:
- केंदू पत्ती (तेंदू पत्ती, Diospyros Melanoxylon) को “ओडिशा का हरा सोना” भी कहा जाता है।
- यह बांस और साल के बीज की तरह ही एक राष्ट्रीयकृत उत्पाद है।
- केंदू पत्ती ओडिशा के सबसे महत्वपूर्ण गैर-काष्ठ वन उत्पादों में से एक है।
- विशेषताएं:
- इसकी महक तंबाकू जैसी ही होती है।
- यह स्वभाव से नमी सोखने वाली (hygroscopic) होती है, जिससे सूखते समय पत्तियों में दरार नहीं पड़ती।
- मुख्य उपयोग: तंबाकू को बीड़ी (स्थानीय सिगरेट) के रूप में लपेटने के लिए इसका उपयोग किया जाता है; साथ ही इसका औषधीय महत्व भी है।
- मुख्य उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात।
- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद ओडिशा तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
- ओडिशा की केंदू पत्तियों की खासियत इसका प्रसंस्कृत (processed) रूप है।
- ओडिशा के अलावा कोई भी अन्य राज्य प्रसंस्कृत केंदू पत्तियों का उत्पादन नहीं करता है।
- कानूनी दर्जा: वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 के अनुसार, केंदू पत्ती को लघु वन उत्पाद (MFP) के अंतर्गत शामिल किया गया है।
