सन्दर्भ:
: हाल ही में, तमिल गीतकार और लेखक आर. वैरामुथु को वर्ष 2025 के ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चुना गया है।
ज्ञानपीठ पुरस्कार के बारे में:
- यह भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जो उन लेखकों को दिया जाता है जिन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्य में उत्कृष्ट योगदान दिया है।
- इसकी स्थापना 1961 में हुई थी।
- पुरस्कार: इस पुरस्कार में 11 लाख रुपये की नकद राशि, वाग्देवी (देवी सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र शामिल है।
- यह पुरस्कार सांस्कृतिक संगठन ‘भारतीय ज्ञानपीठ’ द्वारा प्रायोजित है।
- पात्रता और नियम:
- यह पुरस्कार हर साल किसी ऐसे लेखक को दिया जाता है, जिसने भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित किसी भी भारतीय भाषा (या अंग्रेजी) में रचनात्मक लेखन के माध्यम से भारतीय साहित्य में उत्कृष्ट योगदान दिया हो।
- इस पुरस्कार के लिए केवल उन्हीं रचनात्मक लेखकों के नाम का प्रस्ताव किया जा सकता है जो जीवित हों और भारत के नागरिक हों।
- जिस भाषा को किसी विशेष वर्ष में यह पुरस्कार प्राप्त होता है, उस भाषा पर अगले दो वर्षों तक विचार नहीं किया जाता है।
- जिस लेखक को एक बार यह पुरस्कार मिल चुका हो, उसके नाम पर दोबारा विचार नहीं किया जाता है।
- यदि ज्ञानपीठ पुरस्कार चयन बोर्ड को यह लगता है कि किसी विशेष वर्ष में कोई भी ऐसा उपयुक्त नाम सामने नहीं आया है जो पुरस्कार के अपेक्षित मानकों पर खरा उतरता हो, तो उस वर्ष यह पुरस्कार नहीं दिया जाता है।
- इस पुरस्कार के पहले प्राप्तकर्ता मलयालम कवि जी. शंकर कुरुप थे, जिन्हें 1965 में उनके कविता संग्रह ‘ओडक्कुझल’ के लिए यह पुरस्कार दिया गया था।
