सन्दर्भ:
: हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र की पारिस्थितिकी और जलीय जीवन के लिए रेत खनन से उत्पन्न लगातार खतरे के संबंध में मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के बारे में:
- यह तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मिलन बिंदु पर स्थित है।
- अन्य नाम: इसे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है।
- यह चंबल नदी और उसके बीहड़ों के किनारे स्थित, तीन राज्यों में फैला एक संरक्षित नदी-तटीय अभयारण्य है।
- इस अभयारण्य का मुख्य उद्देश्य गंभीर रूप से लुप्तप्राय घड़ियाल, लाल-मुकुट वाले छत कछुए (Red-crowned roof turtle) और लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन की रक्षा करना है।
- यह जंगली परिवेश में घड़ियालों की सबसे बड़ी आबादी को आश्रय प्रदान करता है।
- इसे एक ‘महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र’ (IBA) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
- भू-आकृति: यहाँ की भू-आकृति बीहड़ों, पहाड़ियों और रेतीले तटों से भरी हुई है।
- वनस्पति: यह ‘काठियावाड़-गिर शुष्क पर्णपाती वन’ पारिस्थितिक क्षेत्र का एक हिस्सा है।
- जीव-जंतु: यह मगरमच्छ, चिकने-रोएँ वाले ऊदबिलाव (smooth-coated otters) का घर है; इसके अलावा यहाँ धारीदार लकड़बग्घे और भारतीय भेड़िये भी पाए जाते हैं।
- यह भारतीय संकरे-सिर वाले मुलायम खोल वाले कछुए (Indian narrow-headed soft shell turtle), तीन-धारी वाले छत कछुए और मुकुटधारी नदी कछुए को भी आश्रय प्रदान करता है।
